किशनगंज: पेरेंट्स पर बढ़ा पढ़ाई का बोझ, कॉपी-किताबें 10 से 20 प्रतिशत तक हुई महंगी
किशनगंज में नए शैक्षणिक सत्र के साथ स्टेशनरी और किताबों की कीमतों में 10-20% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ...और पढ़ें
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नए शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
HighLights
स्टेशनरी और किताबों की कीमतों में 10-20% की बढ़ोतरी हुई।
नए शैक्षणिक सत्र में अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ।
सरकार से शिक्षा सामग्री की कीमतों पर नियंत्रण की अपील।
संवाद सहयोगी, किशनगंज। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्टेशनरी और कॉपी-किताबों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती महंगाई का असर अब बच्चों की शिक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
कॉपी, पेन, पेंसिल, ज्योमेट्री बाक्स, रंग, स्कूल बैग सहित अधिकांश शैक्षणिक सामग्री पहले की तुलना में महंगी हो गई है। ऐसे में स्कूल फीस के साथ स्टेशनरी पर बढ़ा खर्च अभिभावकों का बजट बिगाड़ रहा है।
शहर के स्टेशनरी कारोबारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों के दौरान विभिन्न कंपनियों ने कई बार कीमतों में वृद्धि की है। बढ़ी हुई दर पर ही सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद दुकानदारों का मुनाफा पहले की तुलना में कम हो गया है।
कुछ उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित होने से समय पर सामान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बाजार स्थित एक स्टेशनरी दुकानदार रमेश कुमार ने बताया कि कॉपी, रजिस्टर और अन्य शैक्षणिक सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। एजेंसियों से महंगे दाम पर सामान मिलने के कारण खुदरा बाजार में भी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
हजारों रुपये बढ़ गया पढ़ाई का खर्च
अभिभावक जीतेन कुमार, राजू कुमार पाल ने बताया कि निजी स्कूल में पढ़ने वाले तीसरी और चौथी कक्षा के दो बच्चों की किताबें और स्टेशनरी खरीदने में इस वर्ष क्रमशः 2,500 और 2,700 रुपये खर्च हुए।
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वहीं खगड़ा निवासी राजीव कुमार ने बताया कि उनके तीन बच्चे पांचवीं, सातवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ते हैं। तीनों की किताबें और स्टेशनरी खरीदने में करीब 11 हजार रुपये खर्च करने पड़े।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल फीस, परिवहन शुल्क और यूनिफार्म के साथ अब स्टेशनरी भी महंगी हो गई है, जिससे निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सामग्री की कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई महंगाई की भेंट न चढ़े।