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    चिकेन नेक को मिलेगा नया सुरक्षा कवच: किशनगंज में बनेंगे 2 आर्मी स्टेशन, हाईटेक कंट्रोल सेंटर से होगा लैस

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 06:19 PM (IST)

    किशनगंज में दो स्थायी सेना स्टेशन स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है, जिसके लिए ठाकुरगंज और कोचाधामन में लगभग 400 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। ...और पढ़ें

    ठाकुरगंज के भेलागुड़ी में सेना स्टेशन के लिए चिह्नित स्थल। फोटो- जागरण

    ठाकुरगंज के भेलागुड़ी में सेना स्टेशन के लिए चिह्नित स्थल। फोटो- जागरण

    HighLights

    1. किशनगंज में दो स्थायी सेना स्टेशन स्थापित करने की तैयारी।

    2. ठाकुरगंज और कोचाधामन में 400 एकड़ भूमि चिह्नित की गई।

    3. पूर्वी भारत और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा होगी मजबूत।

    अमरेंद्र कांत, किशनगंज। सीमांचल का किशनगंज जल्द ही देश के पूर्वी सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन सकता है। भारत-नेपाल सीमा से सटे और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के करीब स्थित इस सामरिक जिले में भारतीय सेना के दो स्थायी सेना स्टेशन (आर्मी स्टेशन) स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है।

    प्रशासन ने ठाकुरगंज और कोचाधामन में करीब 400 एकड़ भूमि चिह्नित कर दी है। सेना के अधिकारी प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं और अंतिम मंजूरी के बाद भूमि अधिग्रहण एवं निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पूर्वी भारत की सुरक्षा, ''चिकन नेक'' (सिलीगुड़ी कारिडोर) की रणनीतिक मजबूती और नेपाल-बांग्लादेश सीमा पर बेहतर सैन्य समन्वय से भी है।

    ठाकुरगंज में 203 एकड़ जमीन, कोचाधामन में भी प्रस्ताव

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप 203 एकड़ भूमि सेना स्टेशन के लिए चिह्नित की गई है। वहीं कोचाधामन प्रखंड के सकोर-नटुवापाड़ा क्षेत्र में करीब 200 एकड़ जमीन का चयन किया गया है।

    हालांकि इस स्थान पर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अंतिम निर्णय अभी शेष है। फिलहाल दोनों प्रस्तावों पर प्रशासन और सेना के बीच तकनीकी प्रक्रिया जारी है। सीमांचल का किशनगंज जिला पश्चिम बंगाल से सटा है और नेपाल तथा बांग्लादेश भी इसकी भौगोलिक पहुंच में हैं।

    यह इलाका सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण भू-मार्ग है। ऐसे में यहां सेना की स्थायी मौजूदगी पूरे पूर्वी क्षेत्र की सामरिक क्षमता को मजबूत करेगी।

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    सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इस क्षेत्र में सेना स्टेशन बनने से सीमावर्ती गतिविधियों पर बेहतर निगरानी, सैनिकों की त्वरित तैनाती और आपात परिस्थितियों में तेज सैन्य प्रतिक्रिया संभव होगी।

    सेना स्टेशन में क्या-क्या होगा

    आर्मी स्टेशन केवल सैनिकों की बैरक नहीं होता, बल्कि यह एक पूर्ण सैन्य नगर की तरह विकसित किया जाता है। इसमें सैन्य मुख्यालय, प्रशिक्षण एवं अभ्यास मैदान, हथियार और गोला-बारूद के सुरक्षित भंडार, हाई-टेक संचार एवं कंट्रोल सेंटर, बहुस्तरीय सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था रहती है। सेना स्टेशन बनने से नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और मजबूत होगी।

    सिलीगुड़ी कारिडोर की सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। आपदा, घुसपैठ या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी संकट में सेना तेजी से कार्रवाई कर सकेगी। स्टेशन बनने से आम लोगों को भी फायदा होगा। करोड़ों रुपये के नये विकास कार्य होंगे, क्षेत्रों का आर्थिक महत्व बढ़ेगा।

    फिलहाल दोनों प्रस्तावित स्थलों का तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। अंतिम स्वीकृति रक्षा व गृह मंत्रालय से मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।

    यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में किशनगंज न केवल सीमांचल बल्कि पूरे पूर्वी भारत का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन सकता है। अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने बताया कि दो आर्मी स्टेशन बनाने के दिशा में पहल हो रही है। ठाकुरगंज व कोचाधामन में जमीन का चयन हुआ है। जिसपर आगे की कार्रवाई चल रही है।

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