किशनगंज की जीविका दीदियों ने रचा इतिहास, इस सीजन में अब तक 1 लाख किलो चाय उत्पादन; 3 करोड़ तक होगी कमाई
किशनगंज की महानंदा जीविका टी फैक्ट्री ने इस सीजन में एक लाख किलो चायपत्ती का उत्पादन किया है, जो जीविका दीदियों के प्रयासों और किसानों की आय में वृद्ध ...और पढ़ें

जीविका दीदीयां चाय के साथ। फोटो जागरण

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संवाद सहयोगी, किशनगंज। जीविका दीदियां इस सीजन अब तक एक लाख किलो महानंदा लीफ चायपत्ती का उत्पादन कर चुकी हैं। पिछले वर्ष बिहार सरकार कैबिनेट से टी फैक्ट्री मिलने के बाद यह महानंदा लीफ चायपत्ती उत्पादन का दूसरा सीजन है। इसके लिए किसानों से इस सीजन अब तक लगभग 5 लाख 22 हजार किलोग्राम हरा चायपत्ता की खरीद की गई है।
महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई पोठिया में इस सीजन महानंदा लीफ चायपत्ती का उत्पादन कार्य किया जा रहा है।
जीविका डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि महानंदा एफपीसी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने इस सीजन दस लाख किलो चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जरिए से होती है बिक्री
जीविका दीदियों द्वारा उत्पादित महानंदा लीफ चायपत्ती किशनगंज की पहचान बन रही है। पिछले सीजन डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार की गई थी। सारी चायपत्ती कि बिक्री हो चुकी है।
जीविका सामुदायिक संगठन, संकुल संघ, किसान उत्पादक समूह, ग्रामीण बाजार इत्यादि के माध्यम से महानंदा लीफ चायपत्ती कि बिक्री की जा रही है।
महानंदा लीफ चायपत्ती ई मार्केटिंग साइट अमेजन पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध है। पिछले सीजन महानंदा लीफ चायपत्ती की बिक्री से लगभग 2 करोड़ 83 लाख रुपए की प्राप्ति हुई है।
किसानों को भी फायदा
महानंदा एफपीसी द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई पोठिया में सीधे तौर पर लगभग अठारह सौ किसानों से चाय पत्ता की खरीद की जा रही है। इन किसानों का चाय पत्ता विभिन संग्रहण केंद्रों के माध्यम से 45 किसान संग्रहकों द्वारा टी फैक्ट्री में चाय पत्ता बेचा जा रहा है।
किसानों को सात दिनों के अंदर उनके बैंक खाते में चाय पत्ता की कीमत अंतरण की जा रही है। महानंदा एफपीसी द्वारा अगस्त 2025 माह से दिसंबर 2025 माह तक 6 लाख 86 हजार 251 किलो चाय पत्ता खरीदा गया था। जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
किशनगंज जिला के तीन प्रखंड सदर, पोठिया, ठाकुरगंज में चायपत्ता की खेती बड़े पैमाने पर होती है। महानंदा एफपीसी के बोर्ड आफ डायरेक्टर की जीविका दीदियों द्वारा इस टी फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है।
2002 में सरकारी मदद के साथ हुई थी शुरुआत
चायपत्ती उत्पादन और किसानों की आजीविका पर इसके प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2002 में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को एक विशेष परियोजना स्वीकृत की गई।
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इसे देखते हुए किशनगंज के पोठिया प्रखंड के कुसियारी पंचायत स्थित कालीदास किस्मत में लगभग 10 एकड़ भूमि पर 9.64 करोड़ की लागत से एसजीएसवाई के तहत बिहार सरकार द्वारा एक चायपत्ती कारखाना स्थापित किया गया।
चायपत्ती कारखाने की स्थापना का उद्देश्य चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने वालों स्थानीय किसानों के संघ के माध्यम से कारखाने का संचालन करना था। जीविका के माध्यम से महानंदा का संघ बनाने का निर्णय लिया गया।
इसी कड़ी में महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन 14 जून 2021 को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत 10 प्रमोटर सदस्यों के साथ हुआ।
महानंदा एफपीसी किशनगंज जिले के तीन प्रखंड पोठिया, ठाकुरगंज और किशनगंज सदर में कार्यरत है। वर्तमान में महानंदा एफपीसी में 737 शेयरधारक हैं।
एफपीसी से जुड़ी सभी महिलाएं, जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। ये सभी दीदियां चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने के काम से जुड़ी हैं। कंपनी का संचालन शेयरधारकों द्वारा चुने गए छह सदस्यीय निदेशक मंडल ( बोर्ड आफ डायरेक्टर) द्वारा किया जाता है।