पूर्वोत्तर की लाइफलाइन NH 27 जर्जर: किशनगंज से सिलीगुड़ी तक गड्ढे ही गड्ढे, व्यापार और पर्यटन पर असर
किशनगंज से सिलीगुड़ी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की हालत बेहद खराब है, जहां गहरे गड्ढे और क्षतिग्रस्त सड़कें दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। यह मार्ग पूर् ...और पढ़ें

NH 27 में गड्ढे। फोटो जागरण
HighLights
किशनगंज-सिलीगुड़ी NH-27 पर गहरे गड्ढे, सड़क क्षतिग्रस्त।
पूर्वोत्तर राज्यों की आपूर्ति, व्यापार पर बुरा असर।
मरम्मत के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। अगर आप इन दिनों किशनगंज से सिलीगुड़ी की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर सफर करने निकलते हैं तो कुछ ही किलोमीटर बाद यह अहसास होने लगता है कि यह देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक यह राजमार्ग को मरम्मत का इंतजार है।
एनएच में डामर उखड़ चुका है, कहीं गहरे गड्ढे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पर मजबूर कर देता है। ओवरब्रिजों पर क्षतिग्रस्त सड़क और राजमार्ग के गड्ढों में बारिश का पानी दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ा रहा है। यही नहीं कई जगह तो घास उग गया है।
पूर्वोत्तर राज्यों को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाला यह राष्ट्रीय राजमार्ग केवल बिहार या पश्चिम बंगाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की आपूर्ति व्यवस्था की धुरी है।
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम जाने वाले मालवाहक वाहनों का बड़ा हिस्सा इसी कारिडोर से गुजरता है।
पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्यान्न, दवाइयां, निर्माण सामग्री, फल-सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर है। सामरिक दृष्टि से भी यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
किशनगंज में शहर से लेकर बाइपास तक मुश्किल सफर
किशनगंज शहर की सीमा में प्रवेश करते ही सड़क की खराब स्थिति साफ दिखाई देने लगती है। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। ओवरब्रिजों पर बने गहरे गड्ढे और किनारों पर उगी घास वाहन चालकों के लिए नई परेशानी बन गई हैं।
बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में खासकर दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। भारी ट्रकों के गुजरने से सड़क पर लगातार कंपन होता है और क्षतिग्रस्त हिस्से तेजी से फैलते जा रहे हैं।
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पांजीपाड़ा से सिलीगुड़ी तक भी नहीं मिलती राहत
किशनगंज पार कर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने के बाद भी स्थिति में बहुत सुधार नहीं दिखता। पांजीपाड़ा, चोपड़ा इस्लामपुर और सिलीगुड़ी की ओर कई हिस्सों में सड़क की सतह टूट चुकी है।
कई जगह केवल पैचवर्क कर औपचारिक मरम्मत की गई, लेकिन लगातार बारिश और भारी वाहनों के दबाव से सड़क फिर उखड़ गई। परिणाम यह है कि लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक, बसें और निजी वाहन पूरी गति से नहीं चल पा रहे हैं।
एनएच-27 देश के सबसे व्यस्त मालवाहक कारिडोर में शामिल है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लंबी दूरी की यात्री बसें, कंटेनर, ट्रेलर, तेल टैंकर, एलपीजी गैस वाहन, सीमेंट और खाद्यान्न से लदे ट्रक तथा निजी कारें लगातार इस सड़क का उपयोग करती हैं।
भारी यातायात के कारण सड़क पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसी अनुपात में रखरखाव नहीं होने से समस्या गंभीर होती जा रही है।
व्यापार और पर्यटन पर भी असर
यह मार्ग केवल पूर्वोत्तर राज्यों की आपूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के बीच व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों की भी मुख्य कड़ी है।
किशनगंज, इस्लामपुर और सिलीगुड़ी के व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़क के कारण परिवहन की लागत बढ़ रही है। माल पहुंचने में देरी होती है, जबकि वाहन चालकों को बार-बार मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय सूरज कुमार, दिलीप दास, मु. आसिफ समेत परिवहन व्यवसायियों और वाहन चालकों का कहना है कि केवल गड्ढों में गिट्टी और डामर भर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण, ओवरब्रिजों की समुचित मरम्मत, जल निकासी की व्यवस्था और नियमित रखरखाव ही इस राष्ट्रीय राजमार्ग को फिर से सुरक्षित और सुगम बना सकता है।
पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और सामरिक गतिविधियों के लिए रीढ़ माने जाने वाले एनएच-27 की वर्तमान स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल इस राजमार्ग का यह हाल है, तो अन्य सड़कों की मरम्मत की स्थिति क्या होगी।