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    'चिकेन नेक' पर बढ़ेगी कनेक्टिविटी: चौथे रेल कॉरिडोर का सर्वे शुरू, 24.40 KM लंबी रेललाइन से जुड़ेगा बिहार-बंगाल

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 08:00 PM (GMT+05:30)

    ठाकुरगंज-चतरहाट नई ब्राडगेज रेल परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे शुरू हो गया है, जो चिकेन नेक क्षेत्र में चौथा रेल कारिडोर बनेगा। ...और पढ़ें

    रेललाइन। जागरण

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    संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। देश के सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण चिकेन नेक (सिलीगुड़ी कारिडोर) में रेल के आधारभूत संरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

    रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के बाद ठाकुरगंज-चतरहाट (रंगापानी–धूमडांगी) के बीच प्रस्तावित 24.40 किलोमीटर लंबी नई ब्राडगेज रेल परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) एवं मृदा परीक्षण (सायल इन्वेस्टिगेशन) का कार्य शुरू हो गया है।

    सर्वेक्षण पूरा होने के बाद परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके आधार पर भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक स्वीकृतियां और निर्माण कार्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    रेलवे अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह परियोजना क्षेत्रीय रेल नेटवर्क को सशक्त करेगी। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की निर्बाध कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

    मिट्टी और भू-वैज्ञानिक परीक्षणों पर विशेष जोर

    प्रस्तावित रेलमार्ग के विभिन्न हिस्सों में बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों के माध्यम से भूमि की भार वहन क्षमता, भू-वैज्ञानिक संरचना, भूजल स्तर तथा रेलवे ट्रैक, पुलों और अन्य संरचनाओं के निर्माण की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा।

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    इसके अतिरिक्त प्रस्तावित पुलों के जलमार्ग, स्टेशन यार्ड की संभावनाओं, जल निकासी व्यवस्था, भूमि आवश्यकता तथा यातायात घनत्व से जुड़े तकनीकी पहलुओं का भी विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है, ताकि परियोजना का अंतिम स्वरूप वैज्ञानिक और सुरक्षित आधार पर तय किया जा सके।

    ठाकुरगंज-न्यू जलपाईगुड़ी के बीच बिछेगी पटरी

    नई रेल लाइन के निर्माण के साथ ही चिकेन नेक क्षेत्र में चौथा रेल कारिडोर विकसित हो जाएगा। वर्तमान में इस क्षेत्र में तीन प्रमुख रेल मार्ग है। जिसमें कटिहार–किशनगंज–अलुआबाड़ी रोड–चतरहाट–न्यू जलपाईगुड़ी, कटिहार–किशनगंज–अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी तथा कटिहार–अररिया–ठाकुरगंज–गलगलिया–सिलीगुड़ी संचालित हैं।

    प्रस्तावित रेल लाइन ठाकुरगंज को सीधे न्यू जलपाईगुड़ी मुख्य रेल मार्ग से जोड़ेगी, जिससे रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा तथा मौजूदा रेल लाइनों पर दबाव कम होगा।

    चेंगा नदी पर बनेगा नया रेल पुल

    प्रारंभिक अलाइनमेंट के अनुसार नई रेल लाइन ठाकुरगंज स्टेशन के उत्तर दिशा से निकलकर सियालडांगा और धर्मकांटा चौक के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-327ई को पार करेगी। इसके बाद यह रेलमार्ग बोड़ोबंगला, छैतनगुड़ी, योगी टोला, धापोडांगी, डुमरीडांगी, डोहाडांगी और पतीलाभाषा क्षेत्र से होकर गुजरेगा।

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    पतीलाभाषा घाट के समीप चेंगा नदी पर एक नया रेलवे पुल प्रस्तावित है, जिसके माध्यम से यह रेल लाइन पश्चिम बंगाल की सीमा में प्रवेश कर चतरहाट के निकट मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ेगी। हालांकि अंतिम अलाइनमेंट का निर्धारण तकनीकी सर्वेक्षण और विशेषज्ञ रिपोर्ट के बाद ही किया जाएगा।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्वोत्तर संपर्क के लिए अहम परियोजना

    चिकेन नेक, जिसे सिलीगुड़ी कारिडोर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्थलीय संपर्क मार्ग है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और चीन (तिब्बत) की सीमाओं के निकट स्थित है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में अतिरिक्त और वैकल्पिक रेल कारिडोर का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा, आपूर्ति, आपदा प्रबंधन, माल परिवहन तथा पूर्वोत्तर भारत की निर्बाध कनेक्टिविटी को नई मजबूती प्रदान करेगा। ऐसे में ठाकुरगंज–चतरहाट नई रेल परियोजना को केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक अवसंरचना के महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

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