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    10 साल पहले मशीन तोड़ी गई, फेस अटेंडेंस भी नाकाम; लखीसराय में डॉक्टरों की बायोमीट्रिक हाजिरी लागू करना बड़ी परीक्षा

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 03:07 PM (IST)

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य की है, ताकि समय पर सेवाएं ...और पढ़ें

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    संवाद सहयोगी, लखीसराय। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।

    इसी कड़ी में उन्होंने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी सिविल सर्जनों को अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

    स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य होगी। जो चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे, उन्हें अस्पताल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद अनुपस्थित माना जाएगा। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य अस्पतालों में समय पर चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराना और कार्य संस्कृति में सुधार लाना है।

    लखीसराय सदर अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की बायोमीट्रिक हाजिरी पहले से दर्ज की जा रही है, लेकिन चिकित्सकों की उपस्थिति अब भी हाजिरी रजिस्टर के माध्यम से दर्ज होती है। ऐसे में नए आदेश का प्रभावी अनुपालन कराना अस्पताल प्रशासन और सिविल सर्जन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, करीब दस वर्ष पूर्व सरकार के निर्देश पर सदर अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगाई गई थी। प्रारंभिक दौर में कुछ चिकित्सकों ने बायोमीट्रिक हाजिरी बनानी भी शुरू की थी, लेकिन बाद में यह व्यवस्था विवादों में घिर गई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कुछ चिकित्सकों के विरोध के कारण मशीन क्षतिग्रस्त हो गई थी।

    इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने फेस बायोमीट्रिक प्रणाली लागू करने का प्रयास किया, लेकिन केवल दो चिकित्सकों ने ही इस व्यवस्था के तहत उपस्थिति दर्ज कराने की सहमति दी। पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण फेस बायोमीट्रिक मशीन भी निष्क्रिय होकर रह गई।

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    वर्तमान में सदर अस्पताल के अधिकांश स्वास्थ्यकर्मी बायोमीट्रिक प्रणाली से उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं, जबकि चिकित्सकों की हाजिरी अब भी रजिस्टर आधारित व्यवस्था से संचालित हो रही है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के ताजा निर्देश के बाद सदर अस्पताल सहित जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित कराना प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि बायोमीट्रिक प्रणाली पूरी तरह लागू हो जाती है तो अस्पतालों में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी, मरीजों को समय पर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

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