लखीसराय में सरकारी दावे हवाहवाई: किराये के कमरों में सिमटे आंगनबाड़ी केंद्र, कई सालों से सहायिका के पद खाली
लखीसराय के तेतरहाट पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली सामने आई है, जहाँ केंद्र निजी किराए के कमरों में चल रहे हैं और सहायिका के पद वर्षों से खाली ...और पढ़ें
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रामगढ़ प्रखंड की केंद्र संख्या 56 पर चंद बच्चे। फोटो जागरण
HighLights
तेतरहाट पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र किराए के कमरों में संचालित।
कई केंद्रों में सहायिका के पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
बच्चों की उपस्थिति कम और पोषण-शिक्षा की गुणवत्ता खराब।
अमित कुमार, रामगढ़ चौक (लखीसराय)। सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार बताती है, लेकिन रामगढ़ चौक प्रखंड की तेतरहाट पंचायत में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई।
दैनिक जागरण की टीम द्वारा मंगलवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक की गई आन द स्पाट पड़ताल में तीन आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल व्यवस्था सामने आई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद तीनों केंद्र आज भी निजी मकानों के किराए के कमरों में संचालित हो रहे हैं। कहीं वर्षों से सहायिका का पद खाली पड़ा है तो कहीं बच्चों की उपस्थिति नामांकन के मुकाबले बेहद कम मिली।

(आंनगाड़ी केंद्र संख्या 54 पर खेलते बच्चे)
सवाल यह है कि आखिर ऐसी व्यवस्था में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण और प्रारंभिक शिक्षा कैसे मिलेगी। कुछ केंद्र निजी घर में संचालित मिले। ऐसे में सवाल यह उठ रहा और जांच का विषय भी है कि क्या इसके भी किराए वसूल किए जा रहे हैं।
सबसे पहले सुबह 10 बजे वार्ड संख्या छह स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-54 का जायजा लिया गया। यहां 35 नामांकित बच्चों के विरुद्ध मात्र 19 बच्चे मौजूद थे। अधिकांश बच्चे बिना निर्धारित ड्रेस के थे।

(आंनगाड़ी केंद्र संख्या 54 पर खेलते बच्चे)
सेविका रूबी कुमारी ने बताया कि केंद्र का अपना भवन नहीं है, इसलिए किराए के मकान में संचालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले सहायिका सेवानिवृत्त हो गई, लेकिन आज तक उसकी जगह किसी की नियुक्ति नहीं की गई। इस कारण उन्हें केंद्र संचालन में काफी परेशानी होती है।
इसके बाद सुबह 10:30 बजे वार्ड संख्या नौ स्थित केंद्र संख्या-57 की स्थिति और चिंताजनक मिली। यहां 35 बच्चों के नामांकन के बावजूद केवल सात बच्चे उपस्थित थे। सेविका कल्पना कुमारी और सहायिका राधा देवी मौजूद थीं, लेकिन बच्चों की संख्या सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही थी।
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(बिना पोषाक के आंगनबाड़ी केंद्र पर मौजूद मात्र 12 बच्चे)
सुबह 11 बजे वार्ड संख्या 10 स्थित केंद्र संख्या-56 में भी लगभग यही हाल मिला। यहां भी 35 नामांकित बच्चों के मुकाबले केवल सात बच्चे मौजूद थे। सेविका वीणा कुमारी ने बताया कि आठ वर्ष पूर्व सहायिका का निधन हो गया था, लेकिन आज तक रिक्त पद नहीं भरा गया। वह अकेले ही केंद्र का संचालन कर रही हैं।
केंद्र का अपना भवन नहीं होने के कारण निजी मकान में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बरसात के कारण बच्चों की उपस्थिति कम रही। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इन केंद्रों में बच्चों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय खानापूर्ति कराई जाती है।

(आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर जल जमाव)
उनका कहना है कि पोषण आहार के नाम पर कभी बिस्किट, कभी चाकलेट या फल देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। बच्चों के समुचित मानसिक और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक वातावरण और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब तीनों केंद्र मुख्य सड़क और बाजार के किनारे स्थित हैं, तब भी वर्षों से भवन निर्माण और सहायिका की नियुक्ति जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो सका।

(12 बच्चे आंगनबाड़ी में बिना ड्रेस के हैं उपस्थित गली एवं आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर है जल जमाव)
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार पोषण ट्रैकर ऐप, स्मार्ट मानिटरिंग और आंगनबाड़ी सुदृढ़ीकरण के दावे कर रही है, तब तेतरहाट पंचायत जैसे केंद्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
यदि यही हाल रहा तो कुपोषण दूर करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा देने का सरकारी लक्ष्य कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से तत्काल भवन निर्माण, रिक्त पदों पर नियुक्ति और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने की मांग की है।