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    लखीसराय में अब गांव-गांव पहुंचेगी डिजिटल एक्स-रे मशीन, घर के पास होगी टीबी जांच

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 04:20 PM (IST)

    केंद्र सरकार के 2030 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को गति देने के लिए लखीसराय जिले में अब गांव-गांव जाकर संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी। मोबाइल पोर्टे ...और पढ़ें

    एआई जनरेटेड फोटो

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    HighLights

    1. 2030 तक टीबी मुक्त भारत लक्ष्य को लखीसराय में गति मिलेगी।

    2. मोबाइल डिजिटल एक्स-रे मशीन से अब गांव-गांव होगी टीबी जांच।

    3. सुदूरवर्ती क्षेत्रों में मरीजों की समय पर पहचान और उपचार संभव होगा।

    संवाद सहयोगी, लखीसराय। केंद्र सरकार के वर्ष 2030 तक टीबी (तपेदिक/यक्ष्मा) मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए लखीसराय जिले में अब गांव-गांव जाकर संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी।

    अस्पताल तक नहीं पहुंच पाने वाले सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को अब एक्स-रे के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। चलंत (मोबाइल) पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मी गांवों में ही संदिग्ध मरीजों का एक्स-रे कर टीबी की समय पर पहचान करेंगे।

    मोबाइल यूनिट के रूप में सुदूरवर्ती इलाकों में होगी जांच

    राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से अनिक्रा फाउंडेशन ने जिला यक्ष्मा केंद्र को तीन पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनें तथा प्रशिक्षित एक्स-रे तकनीशियन उपलब्ध कराए हैं। इनमें एक मशीन जिला यक्ष्मा केंद्र, दूसरी सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्थापित की गई है।

    तीसरी मशीन को मोबाइल यूनिट के रूप में सुदूरवर्ती गांवों में ले जाकर टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जिले के कई दूरदराज क्षेत्रों के लोग आर्थिक, भौगोलिक अथवा परिवहन संबंधी कठिनाइयों के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते।

    ऐसे में बीमारी की पहचान और इलाज शुरू होने में देरी होती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है। मोबाइल डिजिटल एक्स-रे सेवा इस समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जिला यक्ष्मा केंद्र और सूर्यगढ़ा सीएचसी में स्थापित पोर्टेबल मशीनों से भी केवल टीबी के संदिग्ध मरीजों का एक्स-रे किया जाएगा।

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    समय से होगा इलाज 

    जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यकतानुसार आगे की जांच एवं उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिला संचारी रोग पदाधिकारी श्रीनिवास शर्मा ने बताया कि चलंत डिजिटल एक्स-रे मशीन से गांवों में ही संदिग्ध मरीजों की पहचान आसान होगी।

    इससे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा और वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में जिले को महत्वपूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य विभाग की अपील है कि दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या बलगम में खून आने जैसे लक्षण होने पर लोग जांच अवश्य कराएं। इससे बीमारी की समय पर पहचान और इलाज संभव हो सकेगा।

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