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    मुंगेर में कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोरो पर, निजी पंडालों का निर्माण चल रहा युद्धस्तर पर

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 04:07 PM (IST)

    श्रावणी मेला शुरू होने में 25 दिन शेष हैं, सुल्तानगंज-देवघर कांवड़ पथ पर तारापुर क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। कांवरियों के लिए निजी स्तर पर यु ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. श्रावणी मेला के लिए तारापुर में कांवर पथ पर तैयारी तेज।

    2. निजी स्तर पर युद्धस्तर पर बन रहे हैं कांवरियों के पंडाल।

    3. कांवर यात्रा से स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार का अवसर।

    संवाद सहयोगी, तारापुर (मुंगेर)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के शुरू होने में अब करीब 25 दिन शेष हैं। ऐसे में सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवड़ पथ पर तैयारियां तेज हो गई हैं। तारापुर अनुमंडल क्षेत्र के 26 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सरकारी इंतजामों के साथ निजी स्तर पर भी युद्धस्तर पर पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है।

    प्रतिदिन औसतन एक लाख से अधिक कांवरिया सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए इसी मार्ग से गुजरते हैं। कांवरिया पथ के दोनों ओर होटल, भोजनालय, विश्राम स्थल, स्नान, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    स्वयंसेवी संस्थाएं, स्थानीय दुकानदार और विभिन्न संगठन भी सेवा शिविर लगाकर श्रद्धालुओं को कई सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराएंगे। कांवड़ यात्रा को लेकर निजी दुकानों और पंडालों के लिए जमीन की मांग भी बढ़ गई है। गोगाचक, बिहमा मोड़ और छत्रहार मोड़ जैसे प्रमुख पड़ावों पर एक कट्ठा जमीन का किराया 50 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच गया है।

    मिल्की गांव के सियाराम शर्मा ने बताया कि उन्होंने तीन कट्ठा जमीन पर पंडाल तैयार कराया है, जहां कांवरियों की संख्या के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। भाजपा नेता मंगल सिंह मंगल ने कहा कि श्रद्धालुओं का रुझान निजी पंडालों की ओर अधिक रहता है।

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    वहीं स्थानीय निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि सावन मेला क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है। जानकारी के अनुसार पूरे कांवड़ पथ पर दो हजार से अधिक निजी पंडाल बनाए जाते हैं।

    प्रशासनिक स्तर पर कांवर यात्रा 30 जुलाई से शुरू होगी, हालांकि श्रद्धालुओं का आगमन 8 से 10 दिन पहले ही शुरू होने की संभावना है। शुरुआती दिनों में निजी पंडाल ही कांवड़ियों के लिए प्रमुख सहारा बनेंगे।

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