प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना रफ्तार पर लगा ब्रेक, गैस सिलिंडर महंगा होने से चूल्हे की ओर लौट रहीं महिलाएं
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना प्रभावित हुई है। लखीसराय के चानन प्रखंड में 6,500 से अधिक ला ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना। फाइल फोटो
HighLights
गैस सिलेंडर महंगा होने से उज्ज्वला योजना प्रभावित हुई।
हजारों लाभार्थी पारंपरिक ईंधन उपयोग करने को मजबूर।
बुकिंग समस्या और बिक्री घटने से योजना धीमी।
संवाद सूत्र, चानन (लखीसराय)। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ने के बाद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है।
इसका सीधा असर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर पड़ा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब और नि:सहाय महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन, एक सिलेंडर और चूल्हा दिया गया था।
योजना के तहत सरकार प्रत्येक सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी भी देती थी और प्रत्येक लाभार्थी को प्रतिवर्ष 12 रिफिल लेने का प्रविधान था, लेकिन समय के साथ सिलेंडर की कीमत बढ़ने के कारण चानन प्रखंड क्षेत्र की अधिकांश ग्रामीण महिलाएं योजना में निष्क्रिय हो गई हैं।
इसका मुख्य कारण पारंपरिक ईंधन लकड़ी और गोबर के गोयठे की आसान उपलब्धता है। गरीब परिवार अक्सर सिलेंडर रिफिल कराने में असमर्थ होते हैं और इसलिए मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाना ही आसान समझते हैं।
महेशलेटा इंडेन गैस एजेंसी के अनुसार प्रखंड में लगभग 11 हजार उज्ज्वला योजना लाभार्थी हैं। इनमें से करीब 4,500 सक्रिय हैं, जबकि 6,500 निष्क्रिय हो चुके हैं। वहीं, निर्भय निषाद एचपी गैस एजेंसी के प्रबंधक के पास लाभार्थियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बुकिंग और बिक्री की समस्या
ग्रामीणों ने कहा कि इंडेन गैस एजेंसी में बुकिंग कराना कठिन हो गया है। यदि बुकिंग प्रक्रिया सरल की जाए, तो उन्हें परेशानी कम होगी। साथ ही, गैस बिक्री की गति भी पहले के मुकाबले धीमी पड़ गई है।
पहले महेशलेटा एजेंसी में प्रतिदिन 300 से अधिक सिलेंडर वितरित होते थे, लेकिन अब ढाई सौ सिलेंडर की बिक्री भी मुश्किल हो रही है।
महिलाओं की बात
कछुआ गांव की कुंती देवी बताती हैं कि पहले सरकार मुफ्त गैस कनेक्शन और सिलेंडर देती थी। अब कीमत बढ़ने से सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है। इसलिए वह जंगल से लकड़ी लाकर चूल्हे पर खाना बनाती हैं।
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संग्रामपुर निवासी मनोरमा देवी कहती हैं कि गरीब परिवार के लिए गैस सिलेंडर का खर्च उठाना मुश्किल है। घर में पशु होने के कारण गोबर से बने गोयठे को जलावन के रूप में इस्तेमाल कर भोजन बनाना पड़ता है।
इस खबर को पढ़कर स्पष्ट है कि ग्रामीण इलाकों में उज्ज्वला योजना के सक्रिय लाभार्थियों को बढ़ाने के लिए गैस की कीमत और बुकिंग व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है।
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