Raksha Bandhan 2026: राखी के धागे ने मिटाई सरहद, नेपाली ट्रेन से भाई की कलाई सजाने भारत पहुंचीं बहनें
भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन जयनगर में हर्षोल्लास से मनाया गया। नेपाल और भारत की बहनों ने नेपाली ट्रेन से जयनगर-जनकपुर की यात्रा कर भाइयों को राखी बांधी।

राखी के धागे ने मिटाई सरहद, नेपाली ट्रेन से भाई की कलाई सजाने भारत पहुंचीं बहनें
HighLights
जयनगर में हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व।
नेपाल से भारत आईं बहनों ने बांधी राखी।
नेपाली ट्रेन से जयनगर-जनकपुर यात्रा की सुविधा मिली।
संवाद सहयोगी, जयनगर (मधुबनी)। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारत और नेपाल की कई बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए यात्रा पर निकलीं।
रक्षाबंधन के दिन नेपाल और भारत की बेटियों ने नेपाली ट्रेन से जयनगर-जनकपुर की यात्रा की। नेपाल रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए सुबह और शाम के फेरे में ट्रेन का परिचालन किया, जिससे दोनों देशों के बीच आवागमन में सहूलियत मिली।
जनकपुरधाम और आसपास के क्षेत्रों से कई बहनें ट्रेन के माध्यम से जयनगर पहुंचीं। जयनगर स्टेशन पर उतरने के बाद बहनें अपने भाइयों के घर जाने के लिए आगे की यात्रा करती नजर आईं।

इस पर्व के चलते स्टेशन परिसर में सुबह से ही यात्रियों की चहल-पहल देखी गई। सुरक्षा के मद्देनजर एसएसबी और आरपीएफ जवानों ने निगरानी रखी। नेपाल से भारत आने वाली या भारत से नेपाल जाने वाली बहनों के हाथों में राखी और मिठाई थी, और उनके चेहरों पर भाई से मिलने की खुशी साफ झलक रही थी।
नेपाल के जनकपुर निवासी मालती देवी, कौशल्या देवी, मधु कुमारी, प्रियंका कुमारी, मोनिका कुमारी और जयनगर की सीता देवी, माधुरी कुमारी, ललिता देवी समेत अन्य बहनों ने बताया कि रक्षा बंधन साल में एक बार आने वाला ऐसा पर्व है, जब दूर रहने के बावजूद भाई-बहन एक-दूसरे के करीब आते हैं।
उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल खुशियों का प्रतीक है, बल्कि दोनों देशों के पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों की मिठास को भी दर्शाता है।
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