Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Samrat Choudhary: पहली बार भाजपा से विधायक का टिकट, सीधा CM की कुर्सी; अमित शाह का वादा पूरा

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 04:49 PM (IST)

    तारापुर विधानसभा सीट पर भाजपा के सम्राट चौधरी ने पहली बार जीत दर्ज कर जदयू के दो दशक पुराने गढ़ को तोड़ दिया। लगभग 45 हजार वोटों के बड़े अंतर से मिली ...और पढ़ें

    HighLights

    1. सम्राट चौधरी ने तारापुर सीट पर पहली बार जीत दर्ज की।

    2. जदयू के दो दशक पुराने गढ़ को भाजपा ने तोड़ा।

    3. 45 हजार वोटों से जीत, अमित शाह का वादा पूरा।

    रजनीश, मुंगेर। तारापुर विधानसभा सीट (Tarapur Vidhan Sabha Seat) की पहचान लंबे समय तक एक स्थिर राजनीतिक गढ़ के रूप में रही है। पिछले दो दशक से यह सीट एनडीए के घटक दल जदयू (JDU) के कब्जे में थी, जहां राजनीतिक समीकरण लगभग तय माने जाते थे, लेकिन वर्ष 2025 के चुनाव ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया।

    पहली बार भाजपा (BJP) ने यहां अपना प्रत्याशी उतारा और सम्राट चौधरी (Samrat Choudharya) ने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि सियासत में एक नई इबारत लिख दी। करीब 45 हजार वोटों के बड़े अंतर से मिली जीत ने उन्हें सीधे बिहार की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।

    फिर बदलने लगे राजनीतिक समीकरण

    यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि एक ऐसा संकेत था जिसने राज्य की सत्ता की दिशा तक बदलने का संदेश दे दिया। तारापुर की जनता ने जिस भरोसे के साथ सम्राट को समर्थन दिया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि अब राजनीति में परंपरागत समीकरणों से आगे बढ़ने का दौर शुरू हो चुका है।

    यह जीत व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही है। भाजपा के लिए यह एक रणनीतिक सफलता है, जिसने यह साबित किया कि पार्टी अब उन क्षेत्रों में भी मजबूत पकड़ बना रही है, जहां पहले उसकी उपस्थिति सीमित थी। तारापुर की जीत ने संगठन के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है।

    खबरें और भी

    अमित शाह का वादा हुआ सच

    चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तारापुर की जनता से अपील करते हुए कहा था कि सम्राट चौधरी को जिताइए, उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।

    उस समय यह एक सामान्य चुनावी बयान माना गया, लेकिन परिणाम आने के बाद यह बयान अब सियासी चर्चा का केंद्र बन गया है। जहां भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ा है।

    यह भी पढ़ें- अब 56, 69 और 78 की तिकड़ी के हाथ में बिहार की सत्ता, सम्राट-विजय और बिजेंद्र की सियासी कहानी

    यह भी पढ़ें- 'बंगाली दादा' के घर से डिप्टी CM की कुर्सी तक कैसे पहुंचे बिजेंद्र यादव? गांव वालों ने बताई पूरी कहानी