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    झमाझम बारिश से चमकी मुंगेर की माटी : धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, कृषि विज्ञानियों ने कहा- कतरनी के लिए पानी है उपयुक्त

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 01:47 PM (GMT+05:30)

    मुंगेर जिले में मानसून की शुरुआती बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है, जिससे धान की रोपनी ने रफ्तार पकड़ ली है और बंपर पैदावार की उम्मीद जगी है। हाल ...और पढ़ें

    मुंगेर में मानसून की मेहरबानी: 72 घंटे की बारिश से धान रोपनी में आई तेजी, किसानों के खिले चेहरे, गुलजार हुए खेत

    मुंगेर में मानसून की मेहरबानी: 72 घंटे की बारिश से धान रोपनी में आई तेजी, किसानों के खिले चेहरे, गुलजार हुए खेत

    HighLights

    1. मुंगेर में मानसून की बारिश से धान रोपनी में तेजी आई।

    2. किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद, लागत वृद्धि से चिंता।

    3. कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत धान किस्मों और DSR विधि की सलाह दी।

    संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। इस बार मानसून की शुरुआती बारिश मुंगेर जिले के अन्नदाताओं और किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। पिछले 72 घंटों के भीतर जिले में हुई लगभग 52 मिलीमीटर बारिश ने सूख रहे खेतों और बिचड़ों को नई संजीवनी दे दी है।

    धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार

    खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने के बाद धरहरा प्रखंड सहित पूरे मुंगेर जिले के अलग-अलग इलाकों में धान रोपनी का काम काफी तेज हो गया है। सुबह होते ही खेतों में किसानों और मजदूरों की चहल-पहल देखने को मिल रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों की रौनक पूरी तरह लौट आई है।

    रोपनी में जुटी महिलाओं की टोली

    खेतों में एक तरफ जहां महिलाओं की टोली पारंपरिक गीतों के साथ धान के पौधे रोपती नजर आ रही है, वहीं किसान खेत तैयार करने में व्यस्त हैं। धरहरा प्रखंड के महगामा, औड़ाबगीचा, इटवा, अमारी, आजीमगंज और धरहरा पंचायतों के खेत रविवार को पूरी तरह गुलजार और हरे-भरे दिखाई दिए।

    इन प्रखंडों में भी तेजी

    धरहरा के अलावा जमालपुर, हवेली खड़गपुर, तारापुर, असरगंज और संग्रामपुर प्रखंडों में भी किसान दल-बल के साथ रोपनी के काम में लग गए हैं। समय पर हुई अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त पानी भरा हुआ है, जिससे धान की पौध लगाने और कदोई (कांदो) करने में काफी सुगमता हो रही है।

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    खुद खेतों में उतर रहे किसान

    मजदूरों की किल्लत और समय पर रोपनी पूरी करने के लिए कई किसान परिवार खुद ही अपनी पूरी मंडली के साथ खेतों में उतरकर काम कर रहे हैं।

    बढ़ती लागत से किसान चिंतित

    एक तरफ जहां बारिश से चेहरे खिले हैं, वहीं दूसरी तरफ मजदूरी दर में वृद्धि और महंगे खाद-बीज से बढ़ती कृषि लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय किसानों का कहना है कि डीजल, उर्वरक, प्रमाणित बीज और मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने के कारण खेती से होने वाला मुनाफा साल-दर-साल कम हो रहा है।

    बंपर पैदावार की बढ़ी उम्मीद

    तमाम चिंताओं और लागत के बावजूद समय पर हुई इस मूसलाधार बारिश से इस वर्ष धान की रिकॉर्ड तोड़ और बंपर पैदावार होने की उम्मीद जगी है। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर जिले में इस बार 3,684 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा लगाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    92 फीसदी बिचड़ा हुआ तैयार

    निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले एक सप्ताह पहले तक ही किसानों ने 92.84 प्रतिशत यानी करीब 3,420 हेक्टेयर क्षेत्र में बिचड़ा आच्छादन का कार्य पूरा कर लिया था। बिचड़ा पूरी तरह तैयार होते ही किसान तेजी से रोपनी में जुट गए हैं और मंगलवार तक जिले में 778.18 हेक्टेयर में धान की रोपनी पूरी भी हो चुकी है।

    36 हजार हेक्टेयर में होगी खेती

    आपको बता दें कि मुंगेर जिले के कुल 36,843 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि क्षेत्र में इस बार बड़े पैमाने पर धान की पैदावार करने का लक्ष्य है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को समय सीमा के अंदर रोपनी पूरी करने, केवल प्रमाणित बीजों का चयन करने और संतुलित उर्वरक प्रयोग की सलाह दी है।

    कृषि वैज्ञानिक की खास अपील

    कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक मुकेश कुमार ने किसानों से हालिया बारिश का पूरा फायदा उठाते हुए सीधी बुआई तकनीक (DSR विधि) अपनाने को कहा है। वैज्ञानिकों ने मुंगेर के वातावरण के अनुकूल सबौर सुरभित, भागलपुर की प्रसिद्ध कतरनी और सबौर दीप जैसी उन्नत तथा अधिक उपज देने वाली प्रजातियों को लगाने की अपील की है।

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