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    मुंगेर में दिव्यांग टीजर के ट्रांसफर और वेतन कटौती का मुद्दा गर्माया, विश्वविद्यालय की सिंडिकेट बैठक में उठी आवाज 

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 04:36 PM (IST)

    मुंगेर विश्वविद्यालय की सिंडिकेट बैठक में दिव्यांग शिक्षक प्रो. एसएन मंडल के स्थानांतरण और डॉ. सुरेश बैठा के वेतन कटौती का मुद्दा उठाया गया। सदस्य भार ...और पढ़ें

    मुंगेर विश्वविद्यालय। फाइल फोटो

    मुंगेर विश्वविद्यालय। फाइल फोटो

    HighLights

    1. दिव्यांग शिक्षक प्रो. एसएन मंडल के स्थानांतरण पर चर्चा।

    2. डॉ. सुरेश बैठा के वेतन कटौती का मामला भी उठा।

    3. सिंडिकेट सदस्य ने उचित समाधान की मांग की।

    संवाददाता, मुंगेर। मुंगेर विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सभागार में गुरुवार को कुलपति प्रो. संजय कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई सिंडिकेट की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

    सिंडिकेट सदस्य भारत सिंह जोशी ने आरडी एंड डीजे कॉलेज मुंगेर के अंग्रेजी विभाग के शिक्षक प्रो. एसएन मंडल के स्थानांतरण का मामला प्रमुखता से उठाया।

    उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षक का स्थानांतरण पहले महिला कॉलेज खगड़िया कर दिया गया। वहीं अब उन्हें राजकीय डिग्री कॉलेज मानसी का ब्रशर बना दिया गया है, जबकि वे स्वयं दिव्यांग हैं।

    साथ ही उनकी पत्नी और बच्चे भी दिव्यांग हैं। ऐसी स्थिति में स्थानांतरण से उन्हें गंभीर पारिवारिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुनर्विचार करे। बैठक में भारत सिंह जोशी ने डॉ. सुरेश बैठा से संबंधित मामला भी उठाया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किया कि आखिर किस आधार पर डॉ. सुरेश बैठा के वेतन मद से राशि की कटौती की गई है।

    उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पास इस बात का क्या प्रमाण है कि जिस भवन में डॉ. बैठा रह रहे हैं वह विश्वविद्यालय की संपत्ति है, जबकि डॉ. बैठा अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं। इस पर मामले की जांच के लिए गठित कमेटी के सदस्यों ने बताया कि संबंधित भवन कॉलेज का है और इसकी जानकारी जांच रिपोर्ट में दर्ज है।

    हालांकि बैठक में इससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इस पर भारत सिंह जोशी ने कहा कि डॉ. सुरेश बैठा इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय की शरण ले सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से समय रहते मामले का उचित निराकरण करने की मांग की।

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