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    बिहार के शिक्षक ध्यान दें! 20 जुलाई तक पूरा करें ये जरूरी काम, वरना रुक सकती है सैलरी 

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 03:53 PM (IST)

    राज्यपाल ने बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए वेतन सत्यापन अनिवार्य किया है, न कराने पर वेतन रुक सकता है। नियमों और प ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. वेतन सत्यापन सभी शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए अनिवार्य।

    2. सत्यापन न कराने पर वेतन रुकने की संभावना।

    3. नियमों संबंधी प्रस्ताव अब विशेष ईमेल पर भेजें।

    राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने सभी विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए वेतन सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया है।

    जो वेतन सत्यापन नहीं कराएंगे, उनका वेतन रुक सकता है। इस मामले में सभी विश्वविद्यालयों को हिदायत दी गई है। बता दें कि वेतन सत्यापन को लेकर कुलपतियों को 20 जुलाई तक कार्य पूरा कराने को कहा गया है।

    इसके लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए एक-एक प्रतिनिधि नामित किए जाएंगे, जो वेतन सत्यापन संबंधी लंबित मामलों का सत्यापन कार्य को कराने और उसकी प्रतिदिन समीक्षा करने में मदद करेंगे।

    अब ई-मेल पर ही भेजे जाएंगे प्रस्ताव 

    राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने विश्वविद्यालयों को जारी निर्देश में कहा है कि नियमों, अध्यादेशों, विनियमों और पाठ्यक्रमों की स्वीकृति से संबंधित प्रस्ताव अब विशेष रूप से बनाए गए ईमेल आइडी पर ही भेजें।

    निर्देश में कहा गया है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और अन्य अधिनियमों के अंतर्गत नियमों, अध्यादेशों, विनियमों और पाठ्यक्रम को स्वीकृति देने का अधिकार कुलाधिपति को प्राप्त है, लेकिन यह देखा गया है कि विश्वविद्यालयों से इन विषयों से संबंधित अधिकांश इलेक्ट्रानिक संवाद राज्यपाल सचिवालय के अनेक इमेल पतों पर भेजे जाते हैं, जिससे उनकी प्रभावी और समयबद्ध ट्रैकिंग कठिन और समय लेने वाली हो जाती है और त्वरित कार्रवाई में बाधा उत्पन्न होती है।

    इसके मद्देनजर सही ईमेल जारी करते हुए कुलपतियों एवं कुलसचिवों से कहा गया है कि इसी ईमेल पते पर विधानों, अध्यादेशों और गु विनियमों तथा पाठ्यक्रमों से संबंधित प्रस्ताव या पत्र भेजें।

    अन्य ईमेल आईडी पर भेजे गये प्रस्ताव या पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय पूरी तरह से उत्तरदायी होंगे।

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