Bihar Politics: नगर सरकार कैबिनेट का चुनाव, मुजफ्फरपुर में पार्षदों की खेमाबंदी शुरू
मुजफ्फरपुर नगर निगम सशक्त स्थायी समिति के चुनाव की संभावित तिथि घोषित होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पार्षद एक-दूसरे का नब्ज टटोल रहे हैं, वही ...और पढ़ें
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मुजफ्फरपुर नगर निगम। फाइल फोटो
HighLights
सशक्त स्थायी समिति चुनाव की घोषणा से राजनीति गर्म।
पार्षदों की खेमाबंदी, चाय पार्टियों का दौर शुरू।
महापौर निर्मला देवी भाजपा सदस्यों को जिताने में प्रयासरत।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। नगर निगम सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव की संभावित तिथि की घोषणा के साथ नगर निगम की राजनीति गर्म हो गई है। नगर सरकार की कैबिनेट में शामिल होने के लिए संभावित उम्मीदवार पार्षदों ने एक दूसरे का नब्ज टटोलना शुरू कर दिया है।
चाय पार्टी के बहाने भी पार्षदों का मेल-मिलाप शुरू हो गया है। वहीं, नगर सरकार पर अपना शिकंजा मजबूत करने के लिए शहर के राजनीतिक आकाओं ने भी पार्षदों की खेमाबंदी शुरू कर दी है।
दो दशक तक नगर निगम की राजनीति में किंग मेकर की भूमिका में रहे पूर्व विधायक विजेंद्र चौधरी समर्थक पार्षदों की बैठक रविवार को एक पार्षद के आवास पर हुई। इसमें उम्मीदवारी पर चर्चा हुई।
महिला नेताओं में लगी रेस
फिलहाल उम्मीदवारों के नाम पर मुहर नहीं लगी, लेकिन आगे की रणनीति बनाई गई। बैठक में सशक्त स्थायी समिति के कुछ वर्तमान सदस्य भी शामिल रहे। वहीं,भाजपा समर्थक पार्षदों की भी एक बैठक हुई।
महापौर निर्माला देवी भाजपा में हैं। इसलिए पार्टी इस प्रयास में लग गई कि उनकी कैबिनेट में अधिक से अधिक सदस्य भाजपा का हो। वर्तमान में भाजपा केपी पप्पू, सुरभि शिखा एवं अमीत रंजन भाजपा से जुड़े हैं।
ये तीनों महापौर कैबिनेट में शामिल हैं। भाजपा खेमा तीनों को फिर से समिति में शामिल कराने की कवायद में लगी है। महापौर निर्मला देवी इस प्रयास में लगी है कि चुनाव में तीनों फिर से जीतकर आएं।
समिति में शामिल होने के लिए आधा दर्जन महिला पार्षद भी सक्रिय हैं। एक महिला पार्षद लगातार अन्य महिलाओं से मिलकर समर्थन जुटा रही है।
फिर से निगम की राजनीति में चल सकता पैसे का खेल
सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव को लेकर नगर निगम में फिर से पैसे का खेल चल सकता है। तीन साल पहले महापौर एवं उपमहापौर के चुनाव में पैसे का जमकर खेल होता था, लेकिन जब महापौर एवं उपमहापौर का चुनाव जनता द्वारा किया गया तो पार्षदों की जेब खाली रह गई।
सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव पार्षदों के गुप्त मतदान से होना है। इसलिए पार्षदों के लिए फिर से अच्छे दिन आ गए हैं।
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