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    बिहार: बच्चे को धूप में खड़ा करने पर स्कूल के खिलाफ FIR, जांच में खुली अनियमितताओं की पोल

    Updated: Thu, 21 May 2026 07:27 AM (IST)

    मुजफ्फरपुर के ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर बच्चे को धूप में खड़ा करने और अमानवीय व्यवहार के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में स्कूल बिना संब ...और पढ़ें

    स्कूल के खिलाफ FIR। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

    स्कूल के खिलाफ FIR। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. बच्चे को धूप में खड़ा करने पर स्कूल पर FIR.

    2. जांच में ऑक्सफोर्ड स्कूल बिना संबद्धता संचालित पाया गया.

    3. आयुक्त ने अन्य स्कूलों की नियमित जांच के निर्देश दिए.

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। विद्यालयों में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार व सरकारी मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। भगवानपुर स्थित आक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विरुद्ध प्राथमिकी का निर्देश दिया है।

    मामला उस समय सामने आया जब एक अभिभावक ने बच्चे के साथ विद्यालय में किए गए व्यवहार की शिकायत प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से की।

    उन्होंने कहा गया कि निर्धारित स्कूल ड्रेस में नहीं पहुंचने पर बच्चे को करीब आधा घंटे तक तेज धूप में खड़ा रखा गया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। अभिभावक ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अमानवीय और अवैध कृत्य करार दिया। प्रमंडलीय आयुक्त ने तत्काल जांच के आदेश दिए।

    स्कूल पर गंभीर आरोप

    जांच के लिए गठित विशेष टीम में उपनिदेशक सामाजिक सुरक्षा धीरज कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी अरविंद कुमार सिन्हा व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुजीत कुमार दास शामिल थे। जांच में स्कूल की कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, विद्यालय बिना संबद्धता के संचालित हो रहा था।

    बच्चों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त वर्ग कक्ष, फर्नीचर, पुस्तकालय व खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। टीम ने पाया कि विद्यालय सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन करने में विफल रहा है।

    उल्लेख किया कि विद्यालय प्रबंधन मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहा था। छात्रों को ड्रेस व पुस्तकें एक विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा था।

    कठोर कार्रवाई के निर्देश 

    रिपोर्ट मिलने के बाद आयुक्त ने विद्यालय प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताई। कहा कि विद्यालय शिक्षा व संस्कार का केंद्र होता है, जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।

    बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का अमानवीय व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। आयुक्त ने संबंधित विद्यालय संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी का निर्देश देते हुए कहा सरकारी दिशा-निर्देशों के विपरीत विद्यालय संचालन व बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार गंभीर अपराध है।

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    साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिले के अन्य निजी विद्यालयों की नियमित जांच करने व सभी विद्यालयों में सरकारी मानकों के पालन कराने का निर्देश दिया है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान व बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नियमों की अनदेखी या बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले विद्यालयों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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