राज्यपाल ने नालंदा में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया, बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर चमकाने का आह्वान
राज्यपाल ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय में दो अत्याधुनिक स्टूडियो का उद्घाटन किया और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। ...और पढ़ें
HighLights
राज्यपाल ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय में दो स्टूडियो का उद्घाटन किया।
डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने का आह्वान।
संवाद सूत्र, जागरण। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) मंगलवार को नालंदा खुला विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने विश्वविद्यालय में नवनिर्मित दो अत्याधुनिक स्टूडियो के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार उद्घाटन किए जाने वाले स्टूडियो में ऑनलाइन क्लास स्टूडियो और मास कम्युनिकेशन स्टूडियो शामिल हैं। इन अत्याधुनिक स्टूडियो के शुरू होने से विश्वविद्यालय की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
ऑनलाइन क्लास स्टूडियो के माध्यम से दूर-दराज के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन कक्षाएं अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जा सकेंगी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि क्या आप जानते हैं कि दुनिया को शांति और करुणा का पाठ पढ़ाने वाली बौद्ध संस्कृति का जन्म कहाँ हुआ था? शायद बहुत से लोग यह नहीं जानते... बौद्ध संस्कृति की जड़ें और इसकी आत्मा इसी पावन धरती पर जन्मी थीं- हमारे बिहार में, हमारे नालंदा में। चलो, मिलकर अपनी विरासत को दुनिया तक पहुँचाएं।
उन्होंने कहा कि नालंदा की ऐतिहासिक धरती पर ज्ञान और संस्कृति के नए समन्वय की रूपरेखा तैयार होने लगी है। बिहार के माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और युवाओं से अपनी समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाने का पुरजोर आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक दौर में प्रभावी 'कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी' (संचार रणनीति) के जरिए ही हम अपनी धरोहर का लोहा मनवा सकते हैं।
दिमाग में मची खलबली, अब बदलाव की बारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने बेहद अनौपचारिक और संवेदनशील लहजे में अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने कहा, "अभी मैं नव नालंदा महाविहार देखकर सीधे नालंदा खुला विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम में आया हूँ। दोनों ही ऐतिहासिक संस्थानों को देखने के बाद मेरे दिमाग में एक सकारात्मक खलबली मची हुई है। मेरा मानना है कि इन दोनों विश्वविद्यालयों के बीच एक मजबूत तालमेल होना चाहिए।"
इंटरनेट पर दिखे नालंदा की ताकत
राज्यपाल ने बदलते समय में जनसंचार (मास कम्युनिकेशन) की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया को यह बताने की जरूरत है कि शांति, करुणा और सौहार्द सिखाने वाली बौद्ध संस्कृति और दर्शन का जन्म कहीं और नहीं, बल्कि हमारे अपने बिहार के इसी पावन नालंदा की मिट्टी में हुआ था। दुर्भाग्यवश, आज भी दुनिया के बहुत से लोग इस ऐतिहासिक तथ्य से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं।
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उन्होंने युवाओं और विश्वविद्यालय के माध्यमों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप सभी के पास इंटरनेट और तकनीक के रूप में एक बहुत बड़ा जरिया मौजूद है। बौद्ध संस्कृति पर आधारित 30 सेकंड, 40 सेकंड और दो मिनट की ऐसी लघु फिल्में (शॉर्ट फिल्म्स) बनाइए जो इस पावन भूमि के इतिहास को बयां करें। इंटरनेट को ऐसी छोटी-छोटी सूचनाप्रद फिल्मों से पाट दीजिए, ताकि पूरी दुनिया नालंदा के इस असली गौरव को पहचान सके।
सधे हुए संवाद की दी सीख
भाषण कला और प्रभावी संचार पर बात करते हुए उन्होंने एक सुंदर उदाहरण भी दिया। राज्यपाल ने मंच से बताया कि किस तरह अपनी बात को सही ढंग से रखने की रणनीति (कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी) समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। उन्होंने कहा कि अपनी मुख्य बात को बेहद शालीनता और सहजता से कहना तथा अन्य जरूरी बातों पर उचित बल देना ही सफल संचार की असली पहचान है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के आला अधिकारी, शिक्षकगण, पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने राज्यपाल के इस अभिनव विचार का करतल ध्वनि से स्वागत किया।
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