PM मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय की 'शास्त्रार्थ' पहल को सराहा, देशभर में अपनाने की अपील
पीएम मोदी ने 'मन की बात' में नालंदा विश्वविद्यालय की 'शास्त्रार्थ' परंपरा को एआई युग की चुनौतियों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अन्य वि ...और पढ़ें
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ऐतिहासिक नालंदा यूनिवर्सिटी में नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो

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संवाद सहयोगी, राजगीर। पीएम मोदी ने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में नालंदा विवि की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि एआई युग के इस दौर के चुनौतियों में भारतीय ज्ञान परंपरा को नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शास्त्रार्थ पहले के माध्यम से एक नई दिशा दे रही है।
वर्तमान परिदृश्य में प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को आज के समय से जोड़ने को लेकर, नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयास को उन्होंने काफी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। जिससे नालन्दा विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है।
भारत के भविष्य को दिशा प्रदान कर रहा नालंदा
मन की बात के दौरान पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय को केंद्र में रखते हुए कहा कि आज जब विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से नई तकनीकों और तीव्र नवाचारों के युग से गुजर रहा है, तब यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मानव की रचनात्मकता सुरक्षित रहे तथा समाज अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ों से जुड़ा रहे।
उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर खोजने का सार्थक प्रयास नालंदा विश्वविद्यालय कर रहा है। उन्होंने बताया कि हजारों वर्षों पुरानी नालंदा की ज्ञान परंपरा आज नए स्वरूप में भारत के भविष्य को दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने स्मरण किया कि दो वर्ष पूर्व उन्हें नालंदा विश्वविद्यालय के नवीन परिसर के लोकार्पण का अवसर प्राप्त हुआ था।
विदेश से भी पहुंचे छात्र
उन्होंने विशेष रूप से विश्वविद्यालय द्वारा पुनर्जीवित की गई शास्त्रार्थ परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपने विचार प्रस्तुत करने का माध्यम नहीं है। ये वाद, संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है।
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इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है।
पीएम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इस प्राचीन भारतीय बौद्धिक परंपरा को अपने दीक्षांत समारोह का एक महत्वपूर्ण अंग बनाया है।
इस अवसर पर पारिस्थितिकी, सतत विकास और प्रौद्योगिकी सहित 25 विभिन्न विषयों पर गहन शास्त्रार्थ एवं विचार-विमर्श आयोजित किए गए, जिनमें 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इनमें लगभग आधे से अधिक प्रतिभागी यहां अध्ययनरत विभिन्न देशों से आए हुए छात्र थे, जो नालंदा विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा और उसके अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को दर्शाता है।
नालंदा विश्वविद्यालय से सीख लेने की अपील
अन्त में PM ने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। इसमें भाग लेने वाले करीब आधे स्टूडेंट्स अन्य देशों से आए थे।
एक प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है। प्रधानमंत्री ने देशभर के अन्य विश्वविद्यालयों से भी आह्वान किया कि वे नालंदा विश्वविद्यालय की इस पहल पर विचार करें।
विश्वविद्यालय ने जताया आभार
उधर, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त विचारों के लिए उनका आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना हमारे लिए प्रेरणादायक एवं गौरव का विषय है। उनके निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान तथा उसके वैश्विक स्वरूप को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शास्त्रार्थ जैसी भारतीय बौद्धिक परंपराओं को अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर हम नालंदा के ज्ञान, संवाद और सह-अस्तित्व की उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसने सदियों तक समस्त एशिया को दिशा दी।
उन्होंने प्रधानमंत्री के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार जताया और कहा कि विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं को समकालीन वैश्विक विमर्शों से जोड़ने के अपने प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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