नर्सरी से निखरी तकदीर: नालंदा की सुशीला देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
चैनपुर की जीविका दीदी सुशीला देवी ने 2019 में एक छोटी पौधशाला शुरू की, जो अब एक सफल नर्सरी बन ...और पढ़ें

सुशीला देवी। (जागरण)
HighLights
सुशीला देवी ने 2019 में शुरू की सफल पौधशाला।
सालाना 3-4 लाख रुपये कमाती हैं, 7-8 को रोजगार।
पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणास्रोत।
संवाद सूत्र, थरथरी (नालन्दा)। थरथरी प्रखंड के जैतपुर पंचायत अंतर्गत चैनपुर गांव की जीविका दीदी सुशीला देवी ने पर्यावरण संरक्षण को आजीविका का मजबूत आधार बना दिया है।
वर्ष 2019 के कोरोना काल में शुरू किया गया उनका छोटा सा प्रयास आज एक सफल नर्सरी के रूप में स्थापित हो चुका है।
बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत नालन्दा वन प्रमंडल, बिहारशरीफ द्वारा संचालित मुख्यमंत्री निजी अन्य प्रजाति पौधशाला योजना से जुड़कर सुशीला देवी ने अपने कार्य को नई दिशा दी है। उनकी पौधशाला में लकड़ी के लिए 10, फल के लिए 10 तथा फूलों के 13 प्रकार के पौधे तैयार किए जाते हैं।
सुशीला देवी बीजू और साटा दोनों तरह के पौधों का उत्पादन करती हैं, जिनकी मांग नालंदा के साथ-साथ अन्य जिलों में भी तेजी से बढ़ रही है।
फूलों की बिक्री से होती है आमदनी
खासकर फूलों के पौधों की बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इस कार्य से वे सालाना लगभग 3 से 4 लाख रुपये अर्जित कर रही हैं, वहीं 7-8 लोगों को स्थायी रोजगार भी मिल रहा है।
स्वावलंबन की मिसाल बन चुकी सुशीला देवी अब अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका यह प्रयास न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।
हालांकि, नीलगाय का बढ़ता आतंक उनके इस प्रयास के लिए चुनौती बनता जा रहा है। पौधों को नुकसान पहुंचने से उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। पूरे पंचायत क्षेत्र में नीलगाय की समस्या किसानों और पौध उत्पादकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
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