3 लाख रुपये का इनाम; बस बनाना है बिहार के श्रावणी मेला पर 2 मिनट का वीडियो, इन्फ्लुएंसर के लिए मौका
बिहार पर्यटन विभाग ने श्रावणी मेला 2026 के प्रचार के लिए सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए वीडियो प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें कांवरिया पथ और धार्मिक स ...और पढ़ें

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए पर्यटन विभाग ने शुरू की विशेष प्रतियोगिता।
HighLights
श्रावणी मेला 2026 के लिए वीडियो प्रतियोगिता शुरू।
इंफ्लुएंसर्स को 3 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार।
सोशल मीडिया पर मेले का प्रचार-प्रसार मुख्य उद्देश्य।
डिजिटल डेस्क, पटना। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए बिहार पर्यटन विभाग ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए विशेष वीडियो प्रतियोगिता शुरू की है।
'श्रावणी मेला 2026 : एक इंफ्लुएंसर की नजर' नाम से आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से श्रावणी मेला, कांवरिया पथ और इससे जुड़े धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को सोशल मीडिया के जरिए प्रस्तुत करना होगा।
प्रतियोगिता में विजेताओं को 3 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। विभाग का उद्देश्य सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव का इस्तेमाल कर श्रावणी मेले की आध्यात्मिकता, लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
28 अगस्त तक चलेगा श्रावणी मेला
इस वर्ष श्रावणी मेले की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हुई है और यह 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। सावन के दौरान पड़ने वाली सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को सोमवारी पड़ रही है।
श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं और कांवरियों के लिए विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सुल्तानगंज, बांका के मंदार क्षेत्र, मुंगेर के खैरा सहित कांवरिया पथ से जुड़े अन्य प्रमुख स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
खबरें और भी
ऐसे में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से इन आयोजनों, धार्मिक स्थलों, कांवरिया पथ और मेले के अनुभव को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
25 हजार फॉलोअर्स होना जरूरी
वीडियो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। प्रतिभागी का भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि प्रतिभागी के फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (पूर्व ट्विटर) और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कुल मिलाकर कम से कम 25,000 फॉलोअर्स होने चाहिए। फॉलोअर्स की संख्या का प्रमाण आवेदन के साथ उपलब्ध कराना होगा।
इसके अलावा प्रतिभागी के सोशल मीडिया अकाउंट का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा। किसी प्रतिभागी के सोशल मीडिया हैंडल पर विवादास्पद, आपत्तिजनक, असामाजिक अथवा किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री नहीं होनी चाहिए। वीडियो में दी जाने वाली जानकारी तथ्यात्मक और प्रमाणिक होना जरूरी है।
30 सेकंड से 2 मिनट तक का होगा वीडियो
प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को 30 सेकंड से कम और 2 मिनट से अधिक अवधि का वीडियो या रील नहीं बनाना होगा।वीडियो का मुख्य विषय श्रावणी मेला और कांवरिया पथ रहेगा।
विशेष रूप से मुंगेर, बांका और भागलपुर क्षेत्र में आने वाले कांवरिया पथ, धार्मिक स्थल, सांस्कृतिक गतिविधियां, स्थानीय परंपराएं, श्रद्धालुओं का अनुभव और पर्यटन की संभावनाएं वीडियो का हिस्सा बन सकती हैं। असंबंधित वीडियो को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन के साथ देनी होगी पूरी जानकारी
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को Google Form के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन का लिंक (https://tourism.bihar.gov.in/) बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट
आवेदन के साथ प्रतिभागी को अपना नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक संपर्क विवरण देना होगा। इसके साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी जैसे वैध पहचान पत्र का विवरण/प्रमाण भी देना होगा।
प्रत्येक वीडियो के साथ उसका शीर्षक और अधिकतम 50 शब्दों में हिंदी या अंग्रेजी में विवरण देना भी अनिवार्य होगा।
HD क्वालिटी और जियोटैग जरूरी
प्रतियोगिता के लिए वीडियो के तकनीकी मानक भी निर्धारित किए गए हैं। वीडियो HD क्वालिटी का होना चाहिए और उसकी फाइल का आकार 100 MB से 1 GB के बीच होना जरूरी है।
इसके अलावा वीडियो का Geotagged होना अनिवार्य है। यानी वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया है, इसकी लोकेशन संबंधी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।
विभाग की ओर से चयनित प्रतिभागियों से आवश्यकता पड़ने पर वीडियो का Raw Footage भी मांगा जा सकता है। ऐसे में प्रतिभागियों को मूल फुटेज सुरक्षित रखना होगा।
AI से बने वीडियो पर पूरी तरह रोक
प्रतियोगिता के नियमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट रोक लगाई गई है। प्रतिभागी द्वारा प्रस्तुत वीडियो में किसी भी तरह से AI का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
जांच के दौरान यदि किसी वीडियो में AI के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रविष्टि को प्रतियोगिता से सीधे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
इसके अलावा वीडियो में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के अधिकारों का उल्लंघन, कॉपीराइट सामग्री का अनधिकृत इस्तेमाल, आपत्तिजनक सामग्री, विवादास्पद दृश्य या किसी प्रकार का लोगो अथवा वॉटरमार्क नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर प्रदर्शन भी बनेगा जीत का आधार
प्रतियोगिता में विजेता का चयन केवल वीडियो की रचनात्मकता या तकनीकी गुणवत्ता के आधार पर नहीं होगा, बल्कि सोशल मीडिया पर उसके प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
चयन के लिए तीन प्रमुख मानदंड तय किए गए हैं
- वीडियो की कुल Reach
- वीडियो पर मिले Likes
- वीडियो को मिले Shares
- X (पूर्व ट्विटर) पर मिलने वाले Retweets को Shares के रूप में गिना जाएगा।
प्रतियोगिता के दौरान चयनित वीडियो बिहार पर्यटन विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किए जाएंगे। इन वीडियो के प्रदर्शन की 45 दिनों तक समीक्षा की जाएगी।
तीनों मानदंडों में सबसे अधिक संयुक्त संख्या प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को विजेता घोषित किया जाएगा। यदि दो प्रतिभागियों के बीच बराबरी की स्थिति बनती है तो अधिकतम Reach वाले वीडियो को प्राथमिकता दी जाएगी।
3 लाख रुपये से लेकर 25 हजार तक के पुरस्कार
- प्रथम पुरस्कार: 3,00,000 रुपये
- द्वितीय पुरस्कार: 2,00,000 रुपये
- तृतीय पुरस्कार: 1,00,000 रुपये
- चतुर्थ पुरस्कार: 2 प्रतिभागियों को 50,000-50,000 रुपये
- प्रशंसा/सांत्वना पुरस्कार: 5 प्रतिभागियों को 25,000-25,000 रुपये
इस तरह प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को न केवल आर्थिक पुरस्कार मिलेगा, बल्कि बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।
पर्यटन विभाग को मिलेगा वीडियो के उपयोग का अधिकार
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को अपने वीडियो के उपयोग को लेकर विभाग के नियमों से सहमत होना होगा। प्रतिभागियों द्वारा जमा किए गए वीडियो का बिना अतिरिक्त अनुमति और अतिरिक्त भुगतान के बिहार पर्यटन विभाग द्वारा उपयोग, पुनरुत्पादन और प्रदर्शन किया जा सकेगा।
विभाग इन वीडियो का प्रचार-प्रसार के साथ-साथ व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी उपयोग कर सकेगा। इसलिए प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को वीडियो तैयार करते समय कॉपीराइट और अन्य तीसरे पक्ष के अधिकारों का विशेष ध्यान रखना होगा।
पहली बार टेंट सिटी और ड्रोन शो भी आकर्षण का केंद्र
श्रावणी मेला-2026 को और आकर्षक बनाने के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पर्यटन मंत्री ने मेले के शुभारंभ के दौरान बताया था कि पहली बार टेंट सिटी, लेजर शो, ड्रोन शो और वॉटर स्क्रीन म्यूजिकल फाउंटेन शो जैसे आकर्षण भी देखने को मिलेंगे।
कांवरियों की सुविधा के लिए सुल्तानगंज से जुड़े कांवरिया मार्ग और अन्य प्रमुख स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की जा रही हैं।
सुल्तानगंज, धौरी, असरगंज, तारापुर, गोड्डीहारी, पहरेवा घाट, आरडीएस कॉलेज, बिठौली, तुर्की, गरौल और रजला सहित विभिन्न स्थानों पर कांवरियों के लिए अत्याधुनिक टेंट सिटी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
इंफ्लुएंसर्स के जरिए बदलेगा बिहार पर्यटन का डिजिटल चेहरा
बिहार पर्यटन विभाग की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर्यटन स्थलों के प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।
फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X जैसे प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों तक पहुंच रखने वाले इंफ्लुएंसर्स अपने वीडियो के जरिए किसी स्थान की संस्कृति, धार्मिक महत्व और स्थानीय अनुभव को सीधे दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं।
श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को डिजिटल माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए यह प्रतियोगिता बिहार की धार्मिक विरासत, लोक संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर भी दे रही है।
यह भी पढ़ें- मुजफ्फरपुर में श्रावणी मेला 2026 का शुभारंभ, मंत्री बोले भोलेनाथ की आराधना देती है सकारात्मक जीवन की प्रेरणा