बिहार की राजनीतिक दिशा तय करेगा बांकीपुर उपचुनाव परिणाम, प्रशांत किशोर के साथ सम्राट सरकार की परीक्षा
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की नई सरकार, भाजपा के नए नेतृत्व और प्रशांत किशोर की नई राजनीति की स्वीकार्यता का पैमाना होगा। यह जनादेश राज्य में पा ...और पढ़ें
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प्रशांत किशोर और सम्राट चौधरी। फाइल फोटो
HighLights
बांकीपुर उपचुनाव परिणाम नई सरकार की स्वीकार्यता तय करेगा।
प्रशांत किशोर की नई राजनीति की यह पहली बड़ी परीक्षा।
भाजपा के गढ़ में जीत सम्राट चौधरी की कार्यशैली पर मुहर।
राज्य ब्यूरो, पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का सोमवार को आने वाला परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि बिहार की नई सरकार एवं भाजपा के नए नेतृत्व की राजनीतिक स्वीकार्यता का भी पैमाना बनेगा।
परिणाम सिर्फ सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए ही नहीं, बल्कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक की दिशा भी तय करने वाला माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से बिहार की राजनीति में खुद को पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनकी रणनीति, संगठन एवं जनाधार की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा है।
प्रशांत के राजनीतिक भविष्य का होगा फैसला
यदि जन सुराज उल्लेखनीय प्रदर्शन करता है या मुकाबले को कांटे की टक्कर में बदलने में सफल रहता है, तो बिहार की राजनीति में प्रशांत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा। वहीं अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन होने पर नई राजनीति के उनके दावे और संगठन की क्षमता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
ऐसे में बांकीपुर का जनादेश केवल एक विधानसभा सीट का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि बिहार में पारंपरिक राजनीति के बीच प्रशांत किशोर की वैकल्पिक राजनीति को जनता कितना स्वीकार कर रही है।
दूसरी ओर हार्डकोर भाजपा की गढ़ माने वाली बांकीपुर सीट पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
ऐसे में परिणाम यह संकेत देगा कि सत्ता परिवर्तन के बाद जनता का भरोसा किस हद तक सरकार और संगठन के साथ बना हुआ है। यह स्थापित तथ्य है कि बिहार ही नहीं देश में हुए सर्वाधिक उपचुनाव के परिणाम सत्तापक्ष के लिए फलदायी होता है।
फिर बांकीपुर को तो लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
सम्राट सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर
यदि भाजपा अपनी सीट सुरक्षित रखने में सफल रहती है, तो यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली, सरकार के शुरुआती फैसलों और नए संगठनात्मक नेतृत्व की चुनावी रणनीति पर जनता की मुहर मानी जाएगी।
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वहीं, यदि भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है या जीत का अंतर काफी घटता है, तो विपक्ष इसे नई सरकार के खिलाफ जन असंतोष और भाजपा के नए नेतृत्व की रणनीति पर सवाल के रूप में पेश करेगा। इससे आगामी चुनावों की रणनीति और राजनीतिक विमर्श पर भी असर पड़ सकता है।
इसी कारण बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम सामान्य उपचुनाव से कहीं अधिक राजनीतिक महत्व रखता है। इस सीट से निकलने वाला संदेश न केवल पटना, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रिजल्ट का इंतजार
अब सबको प्रतीक्षा सोमवार की सुबह आठ बजे से पटना के एएन कॉलेज परिसर में शुरू होने वाली मतणना की है। दोपहर बारह बजे तक परिणाम आने की संभावना है।
करीब 1.30 लाख वोटों की गिनती 14 टेबल पर 30 राउंड में कराई जाएगी। इसके साथ ही उपचुनाव में भाग्य आजमा रहे 25 प्रत्याशी के भविष्य का निर्णय हो जाएगा।
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