बिहार: बेउर जेल लौट रहे 3 कैदी नशे की गोली खाकर बेहोश, पेशी के लिए दानापुर कोर्ट लाई थी पुलिस
बेउर जेल से दानापुर कोर्ट में पेशी के बाद लौट रहे तीन कैदी नशे की गोलियां खाने के बाद बेहोश हो गए, जिन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया। ...और पढ़ें

कैदियों को अस्पताल में कराया गया भर्ती। सांकेतिक तस्वीर

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संवाद सूत्र, फुलवारीशरीफ। बेउर जेल से दानापुर कोर्ट में पेशी के लिए ले जाए गए तीन कैदी नशे की गोली खाने के बाद बेहोश हो गए। घटना ने पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था तथा निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तीनों कैदियों को तत्काल इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया, जहां उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
बेउर जेल में बंद संगीन आपराधिक मामलों के आरोपित शुभम कुमार, विक्की कुमार और अविनाश कुमार को पेशी के लिए दानापुर कोर्ट ले जाया गया था। पेशी के बाद जेल वापस लौटने के दौरान अनिसाबाद गोलंबर के समीप कैदी वाहन जाम में फंस गया।
मोटर साइकिल से पहुंचे सहयोगी ने दी नशे की गोलियां
बताया जा रहा है कि इस दौरान मोटरसाइकिल से पहुंचे कैदियों के सहयोगियों ने नशे की गोलियां उपलब्ध करा दीं। बताया जा रहा है कि एक कैदी ने पांच तथा अन्य दो ने तीन-तीन गोलियां खा लीं, जिसके कुछ देर बाद तीनों की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए।
घटना के बाद पुलिसकर्मियों और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तीनों को पीएमसीएच भेजा गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया गया। फिलहाल तीनों कैदियों को हाई सिक्योरिटी निगरानी में रखा गया है।
कड़ी सुरक्षा और पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट पेशी पर गए कैदियों तक उनके सहयोगी कैसे पहुंच गए और नशे की गोलियां कैसे उपलब्ध करा दी गईं, इसकी छानबीन की जा रही है। यह घटना पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक की ओर इशारा करती है।
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बेउर जेल मुलाकाती परिसर में खुला लीगल ऐड हेल्प डेस्क
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के आदेश और जिला विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देश पर रविवार को बेउर जेल के मुलाकाती परिसर में लीगल ऐड हेल्प डेस्क का उद्घाटन किया गया।
बंदियों के जमानत, अपील, अदालती प्रक्रियाओं और कानूनी अधिकारों से अवगत कराने तथा निशुल्क कानूनी सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसका उद्घाटन बेउर जेल के उप महानिरीक्षक सह अधीक्षक ने किया।
आर्थिक और जानकारी के अभाव में कई परिजन सही कानूनी मार्गदर्शन न मिलने के कारण परेशान होते हैं, इसीलिए जरूरतमंदों तक समय पर न्याय सुनिश्चित करने हेतु यह कदम महत्वपूर्ण है। इस पहल को बंदियों के परिजनों के लिए जनहितैषी और ऐतिहासिक बताया गया।