बिहार भाजपा में 'सम्राट' युग: पसीना बहाने वाले नेताओं की सत्ता में बढ़ी धमक, 9 चेहरों का बढ़ा कद
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते सम्राट चौधरी की टीम के नौ प्रमुख नेताओं को अब सत्ता में महत्वपूर्ण भागीदारी मिली है। ...और पढ़ें
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सीएम सम्राट चौधरी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन। (फाइल फोटो)
HighLights
सम्राट चौधरी की टीम के नौ नेताओं को मिला सत्ता में स्थान।
राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में पांच नेताओं को जगह।
संगठन में सक्रियता का प्रतिफल, कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार।
राज्य ब्यूरो, पटना। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते सम्राट चौधरी के नेतृत्व में संगठन में सक्रिय रहे पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की राजनीतिक हैसियत अब सत्ता के गलियारों में भी मजबूत होती दिख रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की टीम के नौ प्रमुख नेताओं की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित हो चुकी है। भाजपा के भीतर इसे संगठन में निष्ठा और राजनीतिक सक्रियता का प्रतिफल माना जा रहा है।
सम्राट चौधरी जब प्रदेश अध्यक्ष थे, तब उन्होंने संगठन में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई थी। अब उन्हीं नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व मिलने का क्रम तेज हो गया है।
सत्ता में मिला उचित सम्मान
इसी क्रम में राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में सम्राट की टीम के पांच लोगों को जगह दी गई है। भाजपा नेतृत्व इस पूरी कवायद के जरिए यह संदेश भी देना चाहता है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं को समय आने पर सत्ता में भी उचित सम्मान मिलता है।
संगठन से जुड़े रणनीतिकारों का कहना है कि इनमें कई चेहरे ऐसे हैं जिन्होंने लोकसभा व विधानसभा चुनाव में राजनीतिक अभियानों में भाजपा की रणनीति को जमीन पर सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
अब बिहार में सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने की रणनीति के तहत भाजपा ने अपने कई प्रदेश पदाधिकारियों को सरकार एवं संगठन दोनों स्तरों पर नई ताकत दी है।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों एवं मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के नौ ऐसे प्रदेश पदाधिकारी चर्चा में हैं, जिनका राजनीतिक कद पहले की तुलना में काफी बढ़ा माना जा रहा है। भाजपा के अंदर इसे संगठन में सक्रिय नेताओं को सत्ता में उचित भागीदारी देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
मेहनत करने वाले नेताओं पर भरोसा
इससे साफ संकेत गया है कि भाजपा अब केवल चुनावी चेहरों पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक में मेहनत करने वाले नेताओं पर भी भरोसा जता रही है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश है कि संगठन में सक्रियता भविष्य में सत्ता की हिस्सेदारी का आधार बन सकती है।
राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के उपरांत अब निकट भविष्य में विधान परिषद, बोर्ड-निगम एवं आयोग में दायित्व मिल सकता है।
कुछ नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय की भूमिका मिली है तो कुछ को क्षेत्रीय राजनीति में पार्टी का नया चेहरा बनाने की तैयारी चल रही है। भाजपा यह समझ चुकी है कि बिहार की राजनीति में केवल बड़े चेहरे काफी नहीं हैं, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क भी उतना ही जरूरी है।
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पार्टी एक ओर नए चेहरों को अवसर देकर कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समीकरणों को साधकर विपक्ष के मुकाबले अपनी स्थिति और मजबूत करने में जुटी है।
संगठन से निकले नेताओं को सत्ता में बढ़ती हिस्सेदारी देकर भाजपा यह संदेश देने में लगी है कि मेहनती कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में आगे बढ़ने के अवसर लगातार खुले हैं।
नया दायित्व प्राप्त करने वाले नेता
- संजय सरावगी : प्रदेश अध्यक्ष : (राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति-उपाध्यक्ष)
- राजेश वर्मा : प्रदेश महामंत्री : (राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति-सदस्य)
- ललन मंडल : पूर्व प्रदेश महामंत्री : (राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति-सदस्य)
- जगन्नाथ ठाकुर : पूर्व प्रदेश महामंत्री : (राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति-सदस्य)
- शिवेश कुमार : प्रदेश महामंत्री, राज्यसभा सदस्य
- रत्नेश कुशवाहा : प्रदेश मंत्री : विधायक
- संजय गुप्ता : प्रदेश मंत्री : विधायक
- त्रिविक्रम सिंह : प्रदेश मंत्री : विधायक
- सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा : प्रदेश मुख्यालय प्रभारी : विधान पार्षद
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