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    बिहार के जिला अस्पतालों में आर्थो ओटी होंगे हाईटेक, हड्डी के इलाज के लिए नहीं जाना होगा बड़े शहर

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    बिहार के जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में आर्थोपेडिक्स ऑपरेशन थिएटर (आर्थो ओटी) को हाईटेक बनाया जाएगा। ...और पढ़ें

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

    HighLights

    1. जिला अस्पतालों में आर्थो ओटी हाईटेक बनेंगे।

    2. आधुनिक उपकरणों से लैस होंगे सभी आर्थो ओटी।

    3. स्थानीय स्तर पर बेहतर हड्डी उपचार मिलेगा मरीजों को।

    राज्य ब्यूरो, पटना। जिला अस्पतालों और उन अनुमंडलीय अस्पतालों में आर्थोपेडिक्स आपरेशन थियेटर (आर्थो ओटी) को हाईटेक बनाया जाएगा, जहां अस्थि-रोग की सर्जरी हो रही है।

    सभी आर्थो ओटी भारतीय जन स्वास्थ्य मानक के अनुरूप आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होंगे। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों को संसाधनों के आकलन का निर्देश दिया है।

    कहा गया है कि उन उपकरणों की सूची स्वास्थ्य सूची को अविलंब भेजी जाए, जिनकी आवश्यकता है। उपकरणों की यह सूची उन अस्पतालों के संदर्भ में भी उपलब्ध करानी है, जहां अस्थि-रोग की सर्जरी शुरू होने वाली है।

    दरअसल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आर्थो ओटी का सुदृढ़ीकरण प्राथमिकता में है। इसके लिए आर्थो ओटी में गैप एनालिसिस (संसाधनों की कमी का आकलन) कराया जा रहा है।

    संसाधनों के आकलन और अस्पतालों की मांग के अनुसार बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

    उल्लेखनीय है कि आर्थो ओटी के सुदृढ़ होने से सड़क दुर्घटनाओं, फ्रैक्चर, स्पोर्ट इंजुरी और हड्डी से संबंधित अन्य मामलों में मरीजों को जिला स्तर पर ही उपचार की बेहतर सुविधा मिलेगी। अस्थि-रोग की सर्जरी के मामलों में रेफरल की संख्या अपेक्षाकृत कम होगी।

    ओटी के उपकरण

    आर्थोपेडिक अटैचमेंट युक्त ओटी टेबल, एनेस्थीसिया वर्क-स्टेशन, इलेक्ट्रिकल सक्शन मशीन, आटोक्लेव, 12-चैनल इसीजी मशीन, इन्फ्यूजन पंप, सी-आर्म मशीन, आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम, क्रैश कार्ट, मरीज ट्राली, आइवी स्टैंड आदि उपकरण आर्थाे ओटी में होंगे।

    रखरखाव और रिकॉर्ड

    उपकरणों का नियमित रखरखाव होगा। इंस्टालेशन, स्टाक रजिस्टर में अंकन तथा ई-उपकरण पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश है।

    प्रत्येक उपकरण का एसेट आइडी दर्ज होगा। उसकी कार्यशील स्थिति की नियमित निगरानी होगी, ताकि उपचार की व्यवस्था सुचारु रहे।

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