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    बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट: पहले होगा परिसीमन, फिर पड़ेगा वोट

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    बिहार में पंचायत चुनाव टलने की संभावना है क्योंकि राज्य सरकार नए सिरे से पंचायतों का परिसीमन कराने की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना पर ...और पढ़ें

    2011 की जनगणना बनेगी आधार

    2011 की जनगणना बनेगी आधार

    HighLights

    1. पंचायत चुनाव से पहले होगा पंचायतों का परिसीमन।

    2. 2011 की जनगणना को बनाया जाएगा परिसीमन का आधार।

    3. बिहार में पंचायतों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ सकती है।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में पंचायत चुनाव तय समय पर होने की संभावना कम हो गई है। राज्य सरकार पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन कराने की तैयारी में है और इसकी जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी जाएगी।

    इसके लिए विधानमंडल के मानसून सत्र में प्रस्ताव लाया जा सकता है। परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।

    2011 की जनगणना बनेगी आधार

    सरकार ने पंचायतों के परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने का निर्णय लिया है।

    इससे पहले वर्ष 1992 में 1991 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया था। उस प्रक्रिया को पूरा होने में करीब दो वर्ष का समय लगा था।

    बढ़ सकती है पंचायतों की संख्या

    पिछले परिसीमन के बाद राज्य में 8,053 पंचायतों का गठन हुआ था। इस बार पंचायतों की संख्या में करीब डेढ़ गुना तक वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

    चर्चा है कि 8,000 से अधिक आबादी वाली पंचायतों को विभाजित कर नई पंचायतों का गठन किया जाएगा।

    जनसंख्या के आधार पर होगा गठन

    वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 7,000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत, 5,000 की आबादी पर पंचायत समिति क्षेत्र और 500 की आबादी पर एक वार्ड का गठन किया जाता है।

    वहीं 50,000 की जनसंख्या पर जिला परिषद क्षेत्र निर्धारित होता है। एक पंचायत में अधिकतम 14 वार्ड हो सकते हैं।

    प्राकृतिक सीमाएं बनेंगी आधार

    ग्राम पंचायतों के सीमांकन में नदी, नहर, झील, जंगल और पहाड़ जैसी प्राकृतिक संरचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    जहां ऐसी संरचनाएं नहीं होंगी, वहां मंदिर, मस्जिद, श्मशान, कब्रिस्तान, स्कूल, अस्पताल, सड़क या पगडंडी को सीमा निर्धारण का आधार बनाया जाएगा।

    जिलाधिकारियों की होगी अहम भूमिका

    परिसीमन की पूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में वे पंचायतों की सीमाओं का निर्धारण कराने और प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी निभाएंगे।

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