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    पटना सिटी में है 224 साल पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर, लकड़ी और टीन की छत से तपती गर्मी में भी रहता है ठंडा

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 08:15 AM (GMT+05:30)

    पटना सिटी में 224 साल पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर है, जो नेपाली शैली में निर्मित है। यह मंदिर अपनी अनूठी लकड़ी और टीन की छत के कारण गर्मी में भी ठंडा र ...और पढ़ें

    काशी विश्वनाथ मंदिर

    काशी विश्वनाथ मंदिर

    HighLights

    1. पटना सिटी में स्थित 224 साल पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर।

    2. नेपाली ढांचा और लकड़ी-टीन की छत इसे ठंडा रखती है।

    3. सावन और महाशिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

    जागरण संवाददाता, पटना। पटना सिटी चौक से लगभग 100 गज की दूरी स्थित जनता होटल के सामने कठौतिया गली मोड़ से लगभग 40 फीट की दूरी पर 224 वर्ष प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर स्थापित है। नेपाली ढांचा में निर्मित पुराने शिव मंदिर की बनावट काफी आकर्षक है। सावन माह में आसपास व दूर दराज से आनेवाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है।

    मंदिर का इतिहास 

    पंडित नर्मदेश्वर मिश्र उर्फ बासठ बाबा ने बताया कि संवत 1858 में सचिवालय में कार्यरत चपरासी काशीनाथ ने चबूतरा पर शिवलिंग की स्थापना की। चबूतरा जीर्णोद्धार कर्ता फग्गू जी विश्वकर्मा थे। मंदिर में दूर-दूर से भक्त पूजा करने आते थे। 

    वर्ष 1985 में व्यवसायी मन्ना लाल बिहारी लाल व काशी प्रसाद हरलालका ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। नेपाली ढांचा में निर्मित मंदिर में मकराना का संगमरमर लगाया गया। ऊपर टीन व नीचे लकड़ी का छत होने से मंदिर में बैठनेवालों को गर्मी नहीं लगती है।

    मंदिर की विशेषता 

    प्रारंभ से ही लोगों की आस्था व विश्वास मंदिर से जुड़े रहने के कारण मोहल्ले के लोगों ने मिल-जुलकर कार सेवा करते हुए मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रामायण पाठ, अष्टजाम तथा साधु-सन्यासियों के प्रवचन के लिए भव्य बड़े हाल का निर्माण कराया। यहां सुबह-शाम भक्त पूजा-पाठ में लीन रहते हैं। शाम में यहां आरती होती है। महिलाएं हमेशा यहां भजन-कीर्तन करती रहती हैं।

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    सोमवार को जलाभिषेक करने से बाबा भोलेनाथ भक्तजनों की आस्था से प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करते हैं। सावन के मौके पर यहां पर स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज से भी भक्त भगवान शिव के दर्शन को आते हैं। -पंडित नर्मदेश्वर मिश्र उर्फ बासठ बाबा, पुजारी

    सावन व महाशिवरात्रि पर पूजा व जलाभिषेक करनेवाले भक्तों पर शिव सदैव कृपालु रहते हैं। ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। गली के नागरिक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। बाबा भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूरी करते हैं। -शुभाशीष राय, भक्त

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