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    हर्ष फायरिंग की कीमत: बिहार में जश्न की एक गोली ने छीनी जिंदगी, अब ‍BJP विधायक को सजा बना बड़ा संदेश

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 06:38 PM (IST)

    बिहार में हर्ष फायरिंग से हुई मौत के मामले में भाजपा विधायक राजू सिंह को चार साल की सजा और 25 लाख रुपये का जुर्माना हुआ है। यह फैसला जश्न के नाम पर का ...और पढ़ें

    जश्न की गोली, किसी के घर का मातम

    जश्न की गोली, किसी के घर का मातम

    HighLights

    1. भाजपा विधायक राजू सिंह को हर्ष फायरिंग में सजा मिली।

    2. चार साल की जेल और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगा।

    3. जश्न के नाम पर कानून तोड़ने वालों को कड़ा संदेश।

    राधा कृष्ण, पटना। बिहार में हर्ष फायरिंग को लेकर आए हालिया फैसले ने एक बार फिर उस सामाजिक बुराई पर बहस छेड़ दी है, जिसे अक्सर लोग 'जश्न' का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। भाजपा विधायक राजू सिंह को हर्ष फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत के मामले में चार साल की सजा और 25 लाख रुपये के जुर्माने का फैसला सिर्फ एक आरोपी की सजा नहीं, बल्कि समाज के लिए स्पष्ट संदेश है कि जश्न के नाम पर कानून तोड़ने की कोई छूट नहीं है।

    जश्न की गोली, किसी के घर का मातम

    शादी, विजय जुलूस, चुनावी जीत या किसी भी खुशी के मौके पर हवाई फायरिंग की परंपरा कई इलाकों में अब भी देखने को मिलती है।

    लेकिन हवा में चली गोली यह तय नहीं करती कि वह वापस कहां गिरेगी। कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और के जश्न की कीमत अपने अपनों की जान देकर चुकाई है।

    हर साल देशभर में हर्ष फायरिंग से मौत और गंभीर घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं।

    रसूख नहीं, कानून सबसे ऊपर

    इस मामले में एक जनप्रतिनिधि को सजा मिलना यह भी दिखाता है कि कानून की नजर में पद और प्रभाव से अधिक महत्वपूर्ण अपराध और उसके परिणाम हैं।

    यह फैसला उन लोगों के लिए भी संदेश है जो हथियारों का प्रदर्शन सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं। कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

    अब समाज को भी बदलनी होगी सोच

    हर्ष फायरिंग पर सिर्फ पुलिस कार्रवाई या अदालत के फैसले से पूरी तरह रोक नहीं लग सकती। जरूरत सामाजिक जागरूकता की भी है।

    जब तक लोग स्वयं यह नहीं समझेंगे कि एक लापरवाही किसी परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।

    जश्न का असली मतलब खुशियां बांटना है, किसी की जिंदगी छीनना नहीं। विधायक राजू सिंह के मामले में आया फैसला इसी सोच को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है।

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