IGIMS पेपर लीक कांड : 6 MBBS छात्र निलंबित, टॉपर बनने पर भी नहीं मिलेगा गोल्ड मेडल; कर्मचारी पर भी गिरेगी गाज
पटना के आइजीआइएमएस में एमबीबीएस परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और उत्तर पुस्तिका हेरफेर मामले में छह छात्र निलंबित किए गए हैं। इन छात्रों को चार सप्ताह के लिए ...और पढ़ें

आईजीआईएसएस
HighLights
आइजीआइएमएस एमबीबीएस परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक का मामला।
छह एमबीबीएस छात्र चार सप्ताह के लिए निलंबित किए गए।
निलंबित छात्रों को भविष्य में गोल्ड मेडल नहीं मिलेगा।
जागरण संवाददाता, पटना। आइजीआइएमएस की एमबीबीएस सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा 2025 में हुए प्रश्नपत्र लीक और उत्तर पुस्तिका में हेरफेर के मामले में छह छात्रों पर कार्रवाई की गई है। छात्र अनुशासन समिति की अनुशंसा पर 2022 बैच के अभिजीत कुमार, अंकित चंद्रा व यश राज सिन्हा और 2023 बैच के अमित कुमार, अविनाश प्रकाश व सुमित कुमार को निलंबित किया गया है।
तीन अगस्त को प्राचार्य डा. रंजीत गुहा के कार्यालय आदेश के अनुसार इन छात्रों को चार सप्ताह तक छात्रावास और कॉलेज परिसर से बाहर रहना होगा।
निलंबन के साथ गोल्ड मेडल पर भी रोक
निलंबित छात्रों को संस्थान की किसी भी शैक्षणिक या सम्मान संबंधी गतिविधि का लाभ नहीं मिलेगा। यानी भविष्य में इनमें से कोई छात्र टॉपर बनता है तो उसे गोल्ड मेडल समेत संस्थान की ओर से मिलने वाले सम्मान का लाभ नहीं दिया जाएगा।
यह कार्रवाई उप निदेशक डा. विभूति प्रसन्न सिन्हा, डीन एकेडमिक डा. ओम कुमार, सीएओ प्रफुल्ल रंजन, रजिस्ट्रार सर्वेश कुमार समेत पांच सदस्यीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
परीक्षा विभाग के एक कर्मचारी पर गिरेगी गाज
संस्थान की आंतरिक जांच कमेटी ने परीक्षा विभाग के तीन, फार्माकोलाजी, बायोकेमेस्ट्री और माइक्रोबायोलाजी के एक-एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई थी।
इनमें से एक कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। हालांकि, संस्थान के अधिकारियों ने कार्रवाई होने तक संबंधित कर्मचारी का नाम बताने से इन्कार किया है।
चार माह पहले पूरी हो चुकी थी जांच
11 मार्च को शिकायत मिलने के बाद से पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी का मामला चर्चा में है।
पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका के साथ हाल में एनएमसी द्वारा जांच और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगने के बाद संस्थान प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है।
चार दिन पूर्व नए डीन और सहायक डीन को प्रभार दिया गया था। इसके बाद छह छात्रों और एक कर्मचारी पर कार्रवाई हुई।
रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि, फिर भी FIR नहीं
जांच समिति ने 27 अप्रैल को परीक्षा में धांधली की पुष्टि वाली रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय केवल कुछ डीन और अधिकारियों को इधर से उधर किया गया था।
समिति ने पाया था कि उत्तर पुस्तिकाओं के पहले और अंतिम पृष्ठ पर एक जैसे हस्ताक्षर थे, जबकि बीच के पृष्ठों पर अलग हस्ताक्षर मिले।
ऐसे कई संदिग्ध तथ्यों का उल्लेख होने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई और न ही एसआइटी जांच शुरू हुई।
गुमनाम ई-मेल से सामने आया था पेपर लीक मामला
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा दिसंबर 2025 में हुई थी। इसमें करीब 130 छात्र शामिल हुए थे।
11 मार्च को एक अज्ञात ई-मेल आइजीआइएमएस, एनएमसी, स्वास्थ्य विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था।
इसमें प्रश्नपत्र लीक और उत्तर पुस्तिका में अदला-बदली की शिकायत के साथ कुछ वीडियो और अन्य साक्ष्य भी संलग्न थे।
अप्रैल में बनी जांच समिति, फिर शुरू हुई कार्रवाई
इसके बाद 12 अप्रैल को डीन परीक्षा डा. प्रकाश दूबे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई।
समिति ने प्रथमदृष्टया आरोपों को सही मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की। कार्रवाई नहीं होने पर डीन परीक्षा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और प्रो. नीरू गोयल को नया डीन एग्जामिनेशन बनाया गया।
इसके बाद मामले की गहन जांच के लिए पांच मई को तीन अलग-अलग समितियां गठित की गईं।
इन सवालों के जवाब का अब भी इंतजार
जांच समिति ने 27 अप्रैल को धांधली की पुष्टि वाली रिपोर्ट सौंपी, फिर अब तक प्राथमिकी क्यों नहीं हुई, यह सवाल बना हुआ है।
परीक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया था, लेकिन कार्रवाई एक पर ही क्यों हुई।
सात छात्रों को नोटिस दिया गया था, फिर निलंबन केवल छह का ही क्यों हुआ और सातवें छात्र का क्या हुआ, इसका भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
अधिकारियों की जवाबदेही पर भी उठ रहे सवाल
परीक्षा की गोपनीयता भंग होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
परीक्षा में धांधली की पुष्टि के बाद भी दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने में हो रही देरी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
पेपर लीक मामले की टाइमलाइन
- दिसंबर 2025: एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा हुई, जिसमें करीब 130 छात्र शामिल हुए।
- 11 मार्च 2026: अज्ञात ई-मेल से पेपर लीक और उत्तर पुस्तिका बदलने के साक्ष्य समेत शिकायत मिली।
- अप्रैल 2026: डीन एग्जामिनेशन डा. प्रकाश दूबे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित हुई।
- 12 अप्रैल 2026: परीक्षा में गड़बड़ी की प्रथमदृष्टया पुष्टि के बाद संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होने पर डा. प्रकाश दूबे ने इस्तीफा दिया।
- 27 अप्रैल: जांच समिति ने परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि की। पूरक परीक्षा रद्द कर कर्मचारियों और सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
- 5 मई: विस्तृत जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए तीन अलग-अलग समितियां गठित की गईं।
- 28 जुलाई: एनएमसी ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।
- 31 जुलाई: डीन और सहायक डीन के पदों पर करीब दर्जन भर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई।
- 3 अगस्त 2026: छात्र अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर 2022 और 2023 बैच के छह एमबीबीएस छात्रों को चार सप्ताह के लिए निलंबित किया गया।
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