जनगणना 2027: घर बैठे होगी गिनती, किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं; पहली बार जुटाए जाएंगे जातिगत आंकड़े
देश में 2011 के बाद होने वाली 16वीं जनगणना डिजिटल और पेपरलेस होगी, जिसमें किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। नागरिक 17 अप्रैल से 1 मई तक स्वयं ऑनलाइन ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, पटना। देश में 2011 के बाद हो रही 16वीं जनगणना सिर्फ पेपरलेस यानी डिजिटल ही नहीं बल्कि कई मायनों में विशेष होगी। इस बार न कोई तो कहीं कतार लगानी होगी, न ही राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों की जरूरत होगी।
बस आपको 2 से 31 मई के बीच घर आने वाले प्रगणक को 33 आसान-बुनियादी सवालों का सही जवाब और एक मोबाइल नंबर देना है। इस प्रक्रिया में कम समय लगे इसके लिए आप 17 अप्रैल से एक मई के बीच घर बैठे अपने मोबाइल-कंप्यूटर से एसई डाट सेंसस डाट जीओवी डाट इन वेबसाइट पर पहले से अपेक्षित जानकारी भर सकते हैं।
ऐसे में दो से 31 मई के बीच जब प्रगणक आपके घर आएंगे तो केवल दी सूचना की पुष्टि करने के साथ कुछ जरूरी फोटो आदि लेंगे और आपके भवन पर स्थायी मार्कर यानी सेंसस नंबर दे देंगे। इस प्रक्रिया में अधिकतम पांच मिनट में लगेंगे और आप देश की सबसे बड़ी जनगणना के पहले चरण का हिस्सा बन जाएंगे।
घर-भवन के दोहराव की नहीं रहेगी आशंका
आमजन के स्व-गणना के बाद दो से 31 मई तक मकान सूचीकरण का कार्य शुरू होगा। इसमें प्रगणक हर भवन पर स्थायी मार्कर यानी सेंसस नंबर देंगे और शौचालय, बिजली, समेत तमाम सुविधा संबंधी तथ्य एकत्र करेंगे।
खबरें और भी
इसके लिए आवासीय क्षेत्रों में 700 से 800 की जनसंख्या पर मकान सूचीकरण ब्लाक (एचएलबी) बनाया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में मलिन बस्ती (स्लम) व गैर-मलिन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग ब्लाक बनाए जाएंगे ताकि डाटा सटीक हो सके।
इसके अलावा आंकड़ों को अधिक सटीक व पारदर्शी बनाने के लिए हर मकान की जियो मैपिंग व जीपीएस टैगिंग की जाएगी। भवनों की जियो टैगिंग से सरकार को पता चलेगा कि किस इलाके में कितने घर व लोग रहते हैं और उनमें से कितनों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच है या नहीं है। इससे न तो कोई घर छूटेगा और न ही दो बार रिकार्ड में दर्ज हो सकेगा।
घर पर नहीं होंगे तब भी हो जाएगी लिस्टिंग
जिला योजना सह जनगणना पदाधिकारी विदुर भारती ने बताया कि जो लोग अपने घरों से बाहर रहते हैं और उनके घरों में ताला बंद रहता है तो चिंता की बात नहीं है। स्वगणना में व्यक्ति उनका उल्लेख कर सकते हैं।
प्रगणक ताला बंद होने पर आसपास के लोगों से घर के मालिक व परिवार के सदस्यों की यथासंभव जानकारी जुटा कर अपडेट करेंगे। उन्होंने बताया कि मास्टर ट्रेनर्स सभी प्रगणकों को तमाम तकनीकी पहलुओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
जनगणना का पहला चरण: हर घर की पहचान
- 17 अप्रैल से 1 मई: हर नागरिक खुद आनलाइन स्वगणना कर सकेंगे।
- 2 से 31 मई: प्रगणक घर-घर आकर जानकारी जुटाएंगे।
दूसरा चरण: हर व्यक्ति की गिनती
- 2 फरवरी से 31 मार्च : इस चरण में आपकी शिक्षा, रोजगार, सामाजिक स्थिति व जाति जैसी जानकारी ली जाएगी।
पहली बार जातियों का डाटा होगा संग्रहित
आजादी के 78 वर्ष बाद देश में पहली बार जनगणना के दौरान घर के मुखिया की जाति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक जानकारी भी एकत्र की जाएगी। देश में जाति वार जनसंख्या व उनकी सामाजिक-आर्थिक जानकारी के बाद कमजोर वर्ग के लिए अधिक सटीक विकास योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
यही कारण है कि शासन-प्रशासन बार-बार आमजन से अपील कर रहे हैं कि वे सही जानकारी दें और समय पर जानकारी दें ताकि विकास योजनाओं की मजबूत नींव तैयार की जा सके। जाति की सही जनसंख्या व उनके सामाजिक-आर्थिक स्थिति की सही जानकारी मिलने से पता चलेगा कि वर्तमान में कौन का सा वर्ग कितना पिछड़ा है। इससे एक जैसा के बजाय जरूरत के अनुसार विकास की रूपरेखा तैयार की जा सकेगी।
आरक्षण व अन्य नीतियों को तथ्यों के आधार पर मजबूत कर सामाजिक असमानता कम करने के प्रयास होंगे। एक ही जिले में अलग-अलग समुदायों की स्थिति अलग होती है, सरकार के सामने इसकी सही तस्वीर आंकड़ों के रूप में होगी। अबतक कई छोटे या उपेक्षित समुदाय का डेटा सरकार तक नहीं पहुंच पाता था और पहचान के अभाव में उनके विकास की योजनाएं नहीं बन पाती हैं।
यह भी पढ़ें- ईरान युद्ध नहीं चाहता, सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने पटना में कहा- तनाव को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए
यह भी पढ़ें- बिहार में जमीन उपलब्ध नहीं तो टेंडर होगा रद, शहरी परियोजनाओं में देरी होने पर बुडको का सख्त निर्देश
घर के संबंध में सवाल
- मकान नंबर
- जनगणना मकान संख्या
- घर किस प्रकार का है
- घर की दीवार की सामग्री
- घर की छत की सामग्री
- घर का उपयोग (आवासीय-व्यावसायिक आदि)
- घर की स्थिति
घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल
- शौचालय का प्रकार
- शौचालय की उपलब्धता
- प्रकाश का मुख्य स्रोत
- शौचालय की सुलभता
- किस प्रकार का शौचालय है
- गंदे पानी के निकास की व्यवस्था
- स्नानघर की उपलब्धता
- रसोई की उपलब्धता
- खाना पकाने का मुख्य ईंधन
- परिवार के खाने का मुख्य अनाज
परिवार से जुड़े सवाल
- परिवार की संख्या
- घर में रहने वाले लोगों की संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- परिवार के मुखिया का लिंग
- परिवार के मुखिया की जाति (अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, अन्य)
- घर स्वयं का है या किराये का
- घर में कमरों की संख्या
- घर में रहने वाले पति-पत्नी की संख्या
घरेलू उपकरणों की उपलब्धता से जुड़े सवाल
- रेडियो
- टेलीविजन
- इंटरनेट सुविधा
- लैपटाप या कंप्यूटर
- टेलीफोन-मोबाइल फोन या स्मार्टफोन
- साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड
- कार, आटो या वैन
- मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधी सूचना हेतु)