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    Land For Job Scam: लालू-राबड़ी और तेजस्वी-तेजप्रताप समेत अन्य पर आरोप तय, CBI कोर्ट ने कहा- संगठित आपराधिक साजिश

    Updated: Fri, 09 Jan 2026 11:02 AM (GMT+05:30)

    राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारत ...और पढ़ें

    लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा समेत अन्य पर आरोप तय

    लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप, मीसा समेत अन्य पर आरोप तय

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    डिजिटल डेस्क, पटना। जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआइ अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय करते हुए भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं में भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह मामला केवल अलग-अलग लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित आपराधिक गतिविधि का संकेत देता है।

    अदालत के अनुसार, आरोपितों ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया और एक व्यापक आपराधिक साजिश के तहत अपराध को अंजाम दिया। सभी आरोपितों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई थीं और उन्होंने साझा उद्देश्य के साथ कार्रवाई की।

    सीबीआइ की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपितों ने रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन हासिल की।

    ये जमीनें कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर ट्रांसफर कराई गईं। जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया, जिसमें नौकरी, जमीन और संपत्ति के लेनदेन को आपस में जोड़ा गया।

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    अदालत के इस आदेश के बाद मामले में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। आरोप तय होने के साथ ही अब गवाहों की पेशी और साक्ष्यों की जांच का दौर शुरू होगा।

    आरोपितों की ओर से लगाए गए इस तर्क को अदालत ने स्वीकार नहीं किया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि मुकदमा चलाने लायक सामग्री मौजूद है या नहीं, और इस कसौटी पर अभियोजन पक्ष सफल रहा है।

    क्या है जमीन के बदले नौकरी मामला

    जमीन के बदले नौकरी घोटाला कथित तौर पर उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआइ के अनुसार, उस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए कुछ लोगों को नौकरी दिलाई गई।

    इसके बदले उन अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन ली गई, जिसे बेहद कम कीमत पर या बिना उचित भुगतान के लालू परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्टर्ड कराया गया।

    जांच में सामने आया कि ये जमीनें लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और अन्य करीबी रिश्तेदारों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम ट्रांसफर की गईं।

    सीबीआइ का आरोप है कि यह प्रक्रिया किसी एक-दो मामलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक पैटर्न के तहत कई नियुक्तियों में अपनाई गई। इसी आधार पर जांच एजेंसी ने इसे भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला बताया है।

    इस केस में सीबीआइ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अब अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं।

    राजनीतिक हलकों में हलचल

    अदालत के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे कानून के राज की जीत बताया है, वहीं आरजेडी की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देने के संकेत मिलते रहे हैं।

    हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि मामला कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगा।

    आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई और ट्रायल पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह मामला न सिर्फ लालू परिवार के लिए, बल्कि बिहार की राजनीति और केंद्र-बिहार संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

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