पश्चिम बंगाल से बिहार तक फैला नकली नोटों का जाल, साढ़े 5 लाख की फेक करेंसी मामले में 6 आरोपी दोषी करार
एटीएस विशेष न्यायाधीश ने जाली भारतीय मुद्रा नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों को दोषी ठहराया है। इन पर मालदा से नकली नोट लाकर बिहार में खपाने का आरोप था, औ ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, पटना। जाली भारतीय मुद्रा के बड़े नेटवर्क से जुड़े मामले में एटीएस के विशेष न्यायाधीश विपिन कुमार की कोर्ट ने बुधवार को छह आरोपितों को दोषी करार दिया है। सभी आरोपितों को आईपीसी की धारा 489-बी, 489-सी व यूएपीए की धारा 16 के तहत दोषी पाया गया है। सजा पर सुनवाई 3 जून को होगी।
अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद सभी आरोपितों के बंधपत्र रद करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया। दोषी आरोपितों में जहीर अब्बास, अरविंद पासवान, केदार पासवान, उदय कुमार, संतु कुमार व अजय कुमार हैं।
एटीएस के मुख्य अभियोजक मोहम्मद फारूक आजम ने बताया कि 10 जनवरी 2016 को गुप्त सूचना के आधार पर एटीएस की टीम ने गया जिले के हंटरगंज-डोभी इलाके में छापेमारी की थी।
तलाशी के दौरान आरोपितों के पास से पांच-पांच सौ के करीब साढ़े पांच लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए थे। जांच में पता चला कि जाली नोट पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से लाकर बिहार के विभिन्न जिलों में खपाने वाले थे। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से दस लोगों की गवाही कराई गई।
इसके आधार पर अदालत ने सभी आरोपितों को दोषी माना। गौरतलब है कि जांच एजेंसियां लंबे समय से मालदा को जाली भारतीय मुद्रा के बड़े नेटवर्क का केंद्र मानती रही हैं।
बिहार में पहले भी कई मामलों में मालदा कनेक्शन सामने आ चुका है। अब अदालत के फैसले के बाद इस संगठित नेटवर्क पर एटीएस की कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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