क्या है ज्ञान भारतम् मिशन एप? जिसके तहत 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों का होगा डिजिटाइजेशन, पटना में सर्वे का कार्य शुरू
डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान के लिए गहन सर्वेक्षण का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों को ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पटना। जिला प्रशासन ने भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर को सहेजने व उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने शुक्रवार को ज्ञान भारतम् मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को आयाेजित बैठक में इसकी रणनीति को अंतिम रूप दिया।
उन्होंने पंचायत, अंचल, प्रखंड, अनुमंडल व जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग, जिला कला एवं संस्कृति विभाग, विभिन्न महाविद्यालयों के इतिहास के विभागाध्यक्षों व अन्य संबंधित संस्थानों के अधिकारियों को 75 वर्ष या इससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को चिह्नित करने के लिए गहन सर्वेक्षण अभियान चलाने का निर्देश दिया।
बैठक में उप विकास आयुक्त श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर, अपर समाहर्ता राजस्व, जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कीर्ति आलोक, विभिन्न कालेजों के इतिहास के विभागाध्यक्ष व अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अपने इतिहास-ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगी आने वाली पीढ़ियां
डीएम ने बताया कि जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान, सूचीकरण व डिजिटाइजेशन के लिए जिलास्तरीय समिति गठित की गई है। यह टीम सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों के साथ-साथ मठ, मंदिर, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक एवं निजी पुस्तकालयों और व्यक्तिगत संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण करेगी।
इसके तहत कम से कम 75 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या धार्मिक महत्व की हस्तलिखित पांडुलिपियों को चिह्नित कर उनका संरक्षण व ज्ञान भारतम् मिशन एप पर अपलोड किया जाएगा। ये पांडुलिपियां कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या धातु पर लिखी हुई हो सकती हैं।
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डिजिटाइजेशन के बाद आने वाली पीढ़ियां भी भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा से जुड़ सकेंगी। डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित कर मिशन मोड में कार्य करें और तय समयसीमा के भीतर सर्वेक्षण पूरा करें।
अब तक 49 हजार 858 पांडुलिपियों का हो चुका सर्वे
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कीर्ति आलोक ने बताया कि पटना प्राचीन काल का पाटलिपुत्र, मौर्य व गुप्त काल में देश का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र था। उस समय ज्ञान, साहित्य, धर्म और प्रशासन से जुड़े अनेक ग्रंथ तैयार किए जाते थे।
इनकी प्रतियां अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षित रखी जाती थीं। नालंदा व भागलपुर के पास स्थित विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों की परंपरा का खासा प्रभाव पाटलिपुत्र यानी आज के पटना पर था। ऐसे में यहां पांडुलिपियों के लेखन, अध्ययन और संरक्षण की समृद्ध परंपरा विकसित हुई।
अंग्रेजी शासन में भी पटना प्रशासनिक व शैक्षणिक केंद्र था और यहां के पुस्तकालयों में पुराने दस्तावेज व पांडुलिपियां संग्रहित होती थीं। पटना व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में प्राचीन मठ-मंदिर, आश्रम व धार्मिक संस्थानों के साथ कई परिवारों में हस्तलिखित पांडुलिपियां संरक्षित हैं। अबतक जिले में 49 हजार 858 हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वे किया जा चुका है।
क्या है ज्ञान भारतम् मिशन एप
ज्ञान भारतम् मिशन एप भारत सरकार की एक डिजिटल पहल है। इसके माध्यम से देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण व डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। इस एप पर सर्वेक्षण के दौरान मिली पांडुलिपियों की जानकारी अपलोड कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।