सहरसा में मिड-डे मील खाने से 150 छात्र बीमार: हाईकोर्ट ने सरकार और एजेंसी पर उठाए सवाल; SP से मांगी रिपोर्ट
पटना हाई कोर्ट ने सहरसा में मिड-डे मील खाने से 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ...और पढ़ें

पटना हाईकोर्ट की सरकार को फटकार। फाइल फोटो
HighLights
सहरसा में 150 से अधिक बच्चे मिड-डे मील से बीमार।
पटना हाई कोर्ट ने सरकार, एजेंसियों पर उठाए गंभीर सवाल।
कोर्ट ने सहरसा एसपी को जांच निगरानी का निर्देश दिया।
विधि संवाददाता, पटना। सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद 150 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले में पटना हाई कोर्ट सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, खाद्य सुरक्षा विभाग और मिड-डे मील योजना संचालित करने वाली एजेंसी पर कई गंभीर सवाल उठाए।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद एवं न्यायाधीश मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि 144 स्कूलों में भोजन आपूर्ति करने वाली एजेंसी की क्षमता और कार्यप्रणाली की गहन जांच आवश्यक है।
अदालत ने मिड-डे मील निदेशालय से पूछा कि एजेंसियों के चयन के क्या मानदंड हैं और उनकी विश्वसनीयता का आकलन कैसे किया जाता है?
कोर्ट ने सभी एनजीओ को आवंटित स्कूलों की सूची तथा वर्ष 2024-25 और 2025-26 की थर्ड पार्टी असेसमेंट रिपोर्ट भी तलब की है। कोर्ट ने खाद्य नमूनों की जब्ती और जांच प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों पर चिंता जताई।
कोर्ट ने कहा- चिंता का विषय
अदालत ने कहा कि एक ओर पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से सांप और भोजन के नमूने जब्त किए, वहीं दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा अलग से सैंपलिंग किए जाने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है।
कोर्ट ने सात दिनों की देरी से नमूने आरएफएसएल भेजे जाने पर भी सवाल उठाया और इसे “चिंता का विषय” बताया। हाईकोर्ट ने सहरसा एसपी को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने तथा गठित एसआईटी का नेतृत्व करने का निर्देश दिया है।
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साथ ही मिड-डे मील आपूर्ति करने वाली संस्था “भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति” को मामले में पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों से 2 जून तक शपथपत्र और कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।