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    नगर निगम कर्मियों की हड़ताल से पटना बेहाल, घरों से नहीं उठा कचरा

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:13 AM (IST)

    नगर निगम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले दिन पटना में सफाई व्यवस्था चरमरा गई, जिससे घरों से कचरा नहीं उठा और सड़कों पर गंदगी फैल गई। ...और पढ़ें

    निगम मुख्यालय में आयोजित सभा में शामिल कर्मी। (सौ. समिति)

    निगम मुख्यालय में आयोजित सभा में शामिल कर्मी। (सौ. समिति)

    HighLights

    1. निगम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से पटना में सफाई ठप।

    2. घरों से कचरा नहीं उठा, सड़कों पर गंदगी के ढेर।

    3. मानसून में संक्रमण, मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा।

    जागरण संवाददाता, पटना। नगर निगम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर पहले ही दिन गुरुवार को राजधानी की सफाई व्यवस्था पर दिखने लगा।

    शहर के कई इलाकों में घरों से डोर-टू-डोर कचरा नहीं उठाया गया, जबकि सड़कों और प्रमुख मार्गों पर कूड़े के ढेर लग गए।

    गंदगी और बदबू से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया। मानसून के बीच सफाई व्यवस्था ठप होने से संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

    राज्यव्यापी आंदोलन के तहत पटना नगर निगम के करीब आठ हजार स्थायी, दैनिक और आउटसोर्स कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।

    हड़ताल के कारण सुबह शहर के अधिकांश इलाकों में न तो कचरा उठाव हुआ और न ही सड़कों की नियमित सफाई हो सकी।

    हार्डिंग रोड पर निगम के कचरा वाहन खड़े रहे, जबकि किदवईपुरी के कवि रमन पथ, इंद्रपुरी में अटल पथ की सर्विस लेन, नवीन किशोर सिन्हा पथ, मीठापुर मेन रोड और राजीव नगर मेन रोड सहित कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे रहे।

    जगह-जगह फैले कचरे से बदबू उठती रही और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजधानी से सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 1200 टन कचरे का उठाव किया जाता है।

    इसमें करीब 60 प्रतिशत गीला और 40 प्रतिशत सूखा कचरा शामिल होता है। हड़ताल के कारण यह पूरा सिस्टम प्रभावित हो गया है। यदि हड़ताल लंबी चली तो कालोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे का अंबार लगने की आशंका है।

    पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में खुले में पड़े कचरे से मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सफाई व्यवस्था जल्द बहाल नहीं होने पर आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    सभी अंचल कार्यालयों व यार्ड के बाद निगम मुख्यालय में प्रदर्शन

    नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार ने बताया कि सुबह में सभी छह अंचल कार्यालय और यार्ड में प्रदर्शन किया गया।

    फिर दोपहर दो बजे से नगर निगम मुख्यालय में प्रदर्शन और सभा की गई। अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि को-आर्डिनेटर पर दबाव बनाकर चालक बुलवाने और ऐसा नहीं करने पर जेल भेजे जाने की धमकी दी गई है।

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    संयोजक मंगल पासवान, कोषाध्यक्ष नीरज कुमार वर्मा, देवानंद राम, बनारसी मांझी, सुरज राम मुकेश ठाकुर, धर्मेन्द्र कुमार, गीता देवी, मो. सद्दाम, दुर्गा गोंड, नीतीश कुमार, सनी राम, प्रभात कुमार, नितेश पांडेय आदि ने सभा को संबोधित किया।

    निगम कर्मियों की ये हैं मांगे 

    • दैनिक कर्मियों का स्थायीकरण।
    • आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर कर्मियों का नगर निकायों में समायोजन।
    • एसीपी व एमएसीपी पर लगी रोक हटाई जाए।

    हड़ताल से पहले एक माह चला चरणबद्ध आंदोलन

    नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने 30 जुलाई से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल से पहले करीब एक माह तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया।

    30 जून से 25 जुलाई के बीच नगर निगम मुख्यालय समेत विभिन्न अंचलों में धरना-प्रदर्शन किए गए। 28 जुलाई को नगर विकास एवं आवास मंत्री के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। इसके बाद 29 जुलाई की शाम कर्मियों ने मशाल जुलूस निकाला।

    23 जून को आश्वासन के बाद काम पर लौटे थे कर्मी

    वेतन भुगतान में देरी के विरोध में 23 जून को नगर निगम के सभी अंचलों में एजेंसी के सफाईकर्मियों ने काम बंद कर प्रदर्शन किया था।

    इससे कई इलाकों में घंटों तक कचरा उठाव ठप रहा। बाद में संबंधित एजेंसी मौर्यन कार्ट्स ने 25 जून तक लंबित वेतन देने और जुलाई में वेतन वृद्धि का बकाया भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे सफाईकर्मी आंदोलन स्थगित कर काम पर लौट आए थे।

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