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    बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने भाजपा को उसी के हथियार से हराया, जनसंपर्क के लिए चलाए 11 तरह के अभियान 

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा के बूथ प्रबंधन की तर्ज पर माइक्रो मैनेजमेंट से सेंध लगाई। उन्होंने व्यक्तिगत बैठकों और मोहल्ला सभाओं के जर ...और पढ़ें

    प्रशांत किशोर। फोटो एएनआई

    प्रशांत किशोर। फोटो एएनआई

    HighLights

    1. प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में माइक्रो मैनेजमेंट का उपयोग किया।

    2. व्यक्तिगत अभियान और छोटी मोहल्ला बैठकों पर ध्यान केंद्रित किया।

    3. कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई को भी भुनाया।

    जयशंकर बिहारी, पटना। भारतीय जनता पार्टी बूथ स्तर पर अपनी चुस्त प्रबंधन के लिए जानी जाती है। इसी को जीत का मंत्र भी बताती है, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में इसके पन्ना प्रमुख प्रबंधन में प्रशांत किशोर ने अपने माइक्रो मैनेजमेंट से सेंध लगा दी। जैसे मतदाता, वैसा ही कैंपेन चलाकर जनसंपर्क किया।

    बुद्धिजीवी मतदाताओं को मुद्दा सुनाने के बजाए उनकी बातें सुनीं, जिसका प्रभाव प्रचार के शुरुआती दिनों में ही कदमकुआं, बोरिंग रोड, किदवईपुरी जैसे मोहल्लों में काफी सकारात्मक दिखा। मतदाताओं से जनसंपर्क के लिए 11 तरह के अभियान चलाए गए।

    मतदाताओं की सुविधानुसार उसका नाम व्यक्तिगत बैठकें, पदयात्रा, जन संवाद, चाय बैठक, मोहल्ला बैठक, प्रबुद्ध लोगों के साथ चर्चा, अड्डा सम्मेलन, जनसभा आदि दिया गया। 14 से 16 घंटे के प्रचार अवधि की शुरुआत व्यक्तिगत बैठक से प्रारंभ होती थी।

    इसमें विधानसभा क्षेत्र के मतदाता के अतिरिक्त वैसे प्रबुद्ध लोगों से बातचीत की जाती थी, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदताता को प्रभावित करते हैं। इससे मतदाताओं की मनोदशा को कार्यकर्ताओं को समझने में सहूलियत हुई।

    बड़ी सभा की काट के लिए मोहल्ला बैठक

    भाजपा का जोड़ जहां केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों तथा बड़े नेताओं की सभा पर ज्यादा रहा तो प्रशांत किशोर छोटे-छोटे मोहल्ला बैठक को तरजीह दे रहे थे। मोहल्ला बैठकों में 20 से 50 लोगों की भीड़ से सीधा संवाद कर उनसे प्रश्न पूछना और उसका जवाब देना। स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार को प्रभावी ढंग से उठाया।

    इधर-उधर की बात करने के बजाए गली-मोहल्लों की गंदगी और गुणवत्ताहीन कार्यों को दिखाया। भाजपा ने एनडीए के नेताओं की 21 बड़ी सभाएं कीं तो जनसुराज ने 40 से अधिक मोहल्ला बैठकें कीं।

    इसमें सत्ता विरोधी मतदाताओं को रिझाने का पूरा प्रयास किया गया। नई राजनीति और बदलाव के संदेश ने युवाओं को आकर्षित किया। भाजपा का कोर सवर्ण वोटर में सेंध के लिए विभिन्न जिलों से जनसुराज के कार्यकर्ताओं की टीम बुलाई गई, जिनका कार्य अपने गांव व आसपास के लोगों से संवाद कर प्रशांत किशोर की चाय बैठक में शामिल कराना रहा।

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    पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को भी भुनाया

    चुनाव प्रचार बंद होने के बाद पुलिस-प्रशासन ने जनसुराज के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था। प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने इसे भी खूब भुनाया। सत्ता दुरुपयोग का मैसेज इंटरनेट मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया गया।

    लोगों ने भी इसे प्रसारित करने में खूब सहयोग दिया। जक्कनपुर थाने में एसएचओ और प्रशांत किशोर की बहस को आमजन की पीड़ा से जोड़कर खूब रील और मीम बनें।

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