Jyeshtha Purnima 2026: पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर आज लगेगी आस्था की डुबकी, इन शुभ योगों में करें पूजन और दान
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा (पुरुषोत्तम पूर्णिमा) आज रविवार को पटना में शुभ नक्षत्रों और योगों के साथ मनाई जा रही है। श्रद्धालु गंगा स्नान कर दान-पुण्य करे ...और पढ़ें

ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा का पावन पर्व आज। फाइल फोटो
HighLights
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा आज शुभ योगों में मनाई जा रही है।
पटना में श्रद्धालु गंगा स्नान और दान-पुण्य करेंगे।
सत्यनारायण पूजा से धन-संपत्ति और वैभव में वृद्धि होगी।
जागरण संवाददाता, पटना। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा का पावन पर्व आज रविवार को दो शुभ नक्षत्र व तीन शुभ योग में मनाई जाएगी। सनातन धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। तीन साल पर आने वाला पुरुषोत्तम पूर्णिमा को खास माना गया है। रविवार को श्रद्धालु पूर्णिमा के मौके पर गंगा स्नान करने के बाद दान-पुण्य करेंगे।
भारत के दक्षिणात्य संप्रदाय के श्रद्धालु इसे वट पूर्णिमा के रूप में मनाते है। आज के दिन सत्यनारायण प्रभु की विधिवत पूजा के बाद कथा श्रवण करने से समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। पं
डित राकेश झा ने बताया कि पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर अनुराधा नक्षत्र का संयोग बना रहेगा। पूर्णिमा के दिन पूजा पाठ, दान-पुण्य करने से धन संपत्ति एवं वैभव में वृद्धि होती है। चंद्रमा से जुड़ी वस्तु वस्त्र, शक्कर, चावल, दही, चांदी, फूल आदि दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होकर जीवन में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
पूजन मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि: दोपहर 01:10 बजे तक
- चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 06:42 से 11:47 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:20 से 12:14 बजे तक
- शुभ योग मुहूर्त: 01:29 से शाम 03:11 बजे तक
राजगीर में निकलेगी संतों की शाही सवारी
पुरुषोत्तमी मास मेले के दूसरे शाही स्नान को लेकर रविवार को राजगीर आस्था, अध्यात्म और सनातन परंपराओं के विराट उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। साधु-संतों, महंतों और देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी में राजगीर की पावन धरती पर आस्था का अभूतपूर्व महासंगम उमड़ेगा।
प्रशासनिक अनुमान के अनुसार, इस अवसर पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालु विभिन्न पवित्र कुंडों और तीर्थस्थलों में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। शाही स्नान का सबसे बड़ा आकर्षण विभिन्न अखाड़ों, संगतों और मठ-मंदिरों से निकलने वाली संतों की भव्य शाही सवारी होगी।
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ध्वज-पताकाओं, पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक प्रतीकों और भक्ति गीतों के बीच निकलने वाली यह शोभायात्रा श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र बनेगी।
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