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    सावन की पहली सोमवारी पर शिवालयों में लगी कतार; हर-हर महादेव से गूंजा पटना, विशेष संयोग में हाे रही आराधना

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 09:31 AM (GMT+05:30)

    सावन की पहली सोमवारी पर पटना के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। विशेष नक्षत्र और योग के स ...और पढ़ें

    खुसरूपुर के बैकठपुर मंदिर में लगी शिवभक्तों की कतार। जागरण

    खुसरूपुर के बैकठपुर मंदिर में लगी शिवभक्तों की कतार। जागरण

    HighLights

    1. सावन की पहली सोमवारी पर शिवालयों में भक्तों की भीड़।

    2. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र व सुकर्मा योग में 16 सोमवारी व्रत शुरू।

    3. शिव पूजा से सभी मनोरथ पूर्ण होते, कष्ट दूर होते।

    जागरण संवाददाता, पटना। सावन की पहली सोमवारी पर इंद्रदेव भी मानो महादेव का जलाभिषेक करने धरती पर उतर पड़े। सुबह से रुक-रुककर वर्षा हो रही है। देवों के देव महादेव की आराधना के लिए शिव का दरबार सज गया है।

    शहर के महावीर मंदिर, गर्दनीबाग ठाुकरबाड़ी, कदमकुआं चूड़ी मार्केट, खाजपुरा, पंचशिव मंदिर कंकड़बाग समेत अन्य शिव मंदिरों को रंगीन बल्बों के साथ विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया है।

    सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतार लगी है। हर-हर महादेव और बोलबम की गूंज हो रही है। मंदिरों के पास सुबह से चहल-पहल बनी हुई है। 

    आज से शुरू हो रही 16 सोमवारी 

    सावन की पहली सोमवारी का संयोग भी खास है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र व सुकर्मा योग का सुयोग बन पड़ा है। घरों में पार्थिव पूजन के साथ मठ-मंदिरों में भजन-कीर्तन के साथ भगवान शिव का भव्य शृंगार किए जाने की तैयारी है।

    आज से 16 सोमवारी व्रत की भी शुरुआत होगी।  वहीं, मिथिलांचल का लोक पर्व मधुश्रावणी भी आज से शुरू हो रहा है। इसका समापन 15 अगस्त शनिवार को समाप्त होगा। 

    राजधानी से सटे खुसरुपुर के बैकटपुर स्थित श्री गौरीशंकर बैकुंठनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा है। बिहटा स्थित बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य जगहों पर भी भक्त पहुंच रहे हैं। 

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    (पटना के जक्कनपुर शिव मंदिर में पूजा-अर्चना।)

    शिव की पूजा कल्याणकारी

    सावन मास में शिव की पूजा करने से चार गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। भक्तों के लिए इनकी पूजा-आराधना सर्वदा कल्याणकारी ही होता है। सावन के पहली सोमवारी पर महादेव को दूध व गंगाजल से अभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से श्रद्धालुओं को सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं।

    महामृत्युंजय मंत्र, वेदोक्त मंत्र एवं गायत्री मंत्र के साथ रुद्राभिषेक करने के बाद उमा-महेश्वर की श्रृंगार पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। प्रत्येक सोमवारी को रुद्राभिषेक, शिवसहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न, रुद्राष्टक, शिव कवच तथा शिव तांडव स्त्रोत्र का 108 बार पाठ करने से दरिद्रता का ह्रास और शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

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    (बाबा बिटेश्वरनाथ महाधाम में कतारबद्ध श्रद्धालु।)

    शिव पर अर्पित करने वाले वस्तुओं का महत्व

    • जल : मंत्रों के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति का स्वभाव शांत और स्नेहमय होता है।
    • दूध : शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और बीमारियां दूर होती है।
    • दही : जल और दूध के साथ शिवलिंग पर दही चढ़ाने से जीवन में आने वाली परेशानी दूर होती है।
    • घी : शिवलिंग पर घी अर्पित करने से शक्ति में वृद्धि होती है।
    • शहद : भोलेनाथ को शहद चढ़ाने से वाणी में मधुरता आती है।
    • इत्र : शिवलिंग पर इत्र लगाने से विचार पवित्र और शुद्ध होता है।
    • केसर : शिवलिंग पर केसर अर्पित करने से सौम्यता में वृद्धि होती है।
    • चंदन : चंदन चढ़ाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है। समाज में मान सम्मान और यश मिलता है।

    भगवान शिव को करें अर्पित

    • दीर्घायु: अकावन की फूल अर्पित करें।
    • सुख प्राप्ति: हरसिंगार का पुष्प अर्पित करें।
    • शत्रु नाश: घी व सरसो तेल से अभिषेक करें।
    • सुयोग्य पत्नी: बेला का फूल अर्पित करें।
    • मोक्ष प्राप्ति: आक, अलसी या समीपत्र अर्पित करें।
    • लक्ष्मी प्राप्ति: दूध व ईख रस से अभिषेक करें।

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