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    पश्चिम बंगाल में पशु तस्करी पर सख्ती, सीमांचल के पशु हाटों में कारोबार ठप

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 08:13 AM (IST)

    बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद पशु तस्करी पर लगाम लगने से सीमांचल के पशु हाटों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ...और पढ़ें

    मवेशी हाट मेदान, बनमनखी। फोटो जागरण

    मवेशी हाट मेदान, बनमनखी। फोटो जागरण

    HighLights

    1. बंगाल में भाजपा सरकार के बाद पशु तस्करी पर लगाम।

    2. सीमांचल के पशु हाटों में कारोबार और पशुओं की आवक घटी।

    3. तस्करी में कमी से पशुओं की कीमतों पर पड़ा असर।

    प्रकाश वत्स, पूर्णिया। बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद पशु तस्करी पर अचानक बड़ा ब्रेक लगा है। इस ब्रेक का झटका पशु हाटों तक पहुंचने लगा है। पशु हाटों का कारोबार अचानक मंदा पड़ने लगा है।

    हाटों पर बंगाल और अन्य राज्यों के व्यापारियों के आने का क्रम तक घट गया है। पशुओं की आवक भी घटी है। इस चलते पशुओं की कीमत पर भी असर पड़ा है। दुधारु पशुओं के लिए भी खरीदार की राह देखनी पड़ रही है। हल-बैल का ट्रेंड समाप्त होने के बाद पहले से बछड़ों आदि की कीमत कम थी, अब इसकी कीमत से पशु पालक का मन ही भिन्ना उठता है।

    तस्करी से पशु हाटों का रहा है पुराना कनेक्शन

    सीमांचल में बड़े व छोटे पशु हाटों की संख्या दो दर्जन से अधिक है। इन हाटों को पशु तस्करी का बड़ा आधार माना जाता रहा है। कई बार तस्करी के पशुओं की बरामदगी में भी यह सामने आ चुका है। हिंदूवादी संगठनों द्वारा भी यह सवाल उठाया जाता रहा है।

    कृषि व पशुपालन यहां के अधिकांश लोगों की जीविका का आधार है। इस चलते यहां के पशु हाटों में बंगाल व उत्तर प्रदेश सहित प्रदेश के अन्य शहरों से भी व्यापारियों का आगमन होता है।

    बनमनखी व कटिहार के डूमर जैसे हाटों पर बड़े फलक पर यह कारोबार होता है। लेकिन गत एक माह से इसमें तेज गिरावट आई है। इसकी वजह पशु तस्करी में आई कमी मानी जाती है।

    तृणमूल शासन में बड़े तस्करों का सुरक्षित ठिकाना था बंगाल

    सीमांचल का सीधा जुड़ाव बंगाल से है। पशुओं की तस्करी बंगाल के रास्ते ही बांग्लादेश होती रही है। पशुओं को सीमा पार कराने वाले अधिकांश पशु तस्कर बंगाल के ही हैं। खासकर सीमांचल से लगे बंगाल के जिलों में इन तस्करों द्वारा अवैध अड़गड़ा तक तैयार कर रखा गया था।

    वहां मालवाहक वाहनों से पशुओं को उतारने तक की व्यवस्था होती थी। अब सरकार बदलने के बाद पशु तस्कर भूमिगत होने लगे हैं। माना जा रहा है कि इस स्थिति ने पशुओं के बाजार को प्रभावित किया है।

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    लगभग एक माह से हाट पूरी तरह मंदा पड़ गया है। पशुओं की डिमांड में कमी के चलते कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। पशुओं के हाट पहुंचने की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। अचानक बाजार में यह गिरावट समझ से परे है। बंगाल से आने वाली व्यापारियों की संख्या भी घटी है। इसका असर पशुओं की कीमत पर भी पड़ रहा है।

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    मु. तजमुल, प्रबंधक, मवेशी हाट, बनमनखी।

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