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    बिहार में जमीन नपवाना हुआ महंगा, अब ऑनलाइन आवेदन के साथ देनी होगी दोगुना फीस

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 07:22 AM (IST)

    राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी के लिए नई शुल्क दरें निर्धारित की हैं, जिससे अब लोगों को लगभग दोगुना भुगतान करना होगा। ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर।

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. जमीन मापी शुल्क में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई।

    2. ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के लिए अलग दरें निर्धारित।

    3. मापी प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन व पारदर्शी।

    मनोज कुमार, पूर्णिया। अब जमीन की मापी कराना भी महंगा हो गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी के लिए नई शुल्क दरें निर्धारित कर दी हैं।

    विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क लगभग दोगुना का भुगतान करना होगा।

    विभाग के सचिव द्वारा जारी आदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं। अपर समाहर्ता रवि राकेश ने बताया कि विभागीय निर्देश के आलोक में सभी संबंधित अधिकारियों को नये दर के आधार पर मापी कराने का निर्देश दिया गया है।

    ग्रामीण क्षेत्र में प्रति खेसरा 1000 देय होगा शुल्क

    नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए रैयत को प्रति खेसरा एक हजार रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क चार हजार रुपये तक देना होगा।

    पहले सामान्य मापी के लिए अधिकतम शुल्क एक हजार रुपये ही लिया जाता था। वहीं, तत्काल मापी की सुविधा के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

    वहीं, विभाग ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग मापी शुल्क निर्धारित किया है। नगर निकाय क्षेत्रों में सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क तय किया गया है।

    जबकि तत्काल मापी कराने पर अब प्रति खेसरा चार हजार रुपये और अधिकतम 16 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा।

    दो दिनों के अंदर करनी होगी मापी

    विभाग द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब जमीन मापी के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

    आवेदन संबंधित अंचल कार्यालय को प्राप्त होने के बाद उसे अंचल अमीन के पास भेजा जाएगा। संबंधित अमीन को दो दिनों के अंदर मापी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन माध्यम से ही करना होगा।

    दावा किया गया है कि नई व्यवस्था से रैयतों को अब अंचल कार्यालय और अमीन के यहां चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा मापी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। हालांकि, बढ़ी हुई शुल्क दरों को लेकर आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    खबरें और भी

    प्रखंडों में मापी के लिए प्राप्त आवेदनों की स्थिति

    पूर्णिया जिला - क्षेत्रवार डेटा
    क्रमांक नाम संख्या प्रतिशत
    1 अमौर 1042 92.28
    2 बैसा 1087 85.39
    3 बनमनखी 2673 57.44
    4 बीकोठी 1349 71.30
    5 बायसी 1451 85.89
    6 भवानीपुर 1706 82.37
    7 डगरूआ 876 87.50
    8 धमदाहा 3213 77.90
    9 जलालगढ़ 729 80.09
    10 कसबा 3342 82.91
    11 केनगर 1422 71.60
    12 पूर्णिया पूर्व 1961 67.01
    13 रूपौली 2754 71.71
    14 श्रीनगर 1231 73.35

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    राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशानुसार ई-मापी के शुल्क में वृद्धि की गई है। अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आनलाइन मापी की व्यवस्था लागू होने से लोगों को अब अंचल कार्यालयों का चक्कर लगाना नहीं पड़ रहा है। साथ ही मापी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हुई है।

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    रवि राकेश, अपर समाहर्ता।