महानंदा और दास नदी का रौद्र रूप, बेघर हुए दर्जनों परिवार; मलहाना गांव पर मंडराया अस्तित्व का खतरा
पूर्णिया के बायसी में महानंदा नदी के कटाव से मलहाना गांव के 20 परिवारों के घर नदी में समा गए हैं, जिससे दर्जनों अन्य घर भी खतरे में हैं। ...और पढ़ें

गांव के समीप पहुंचा नदी का पानी। (जागरण)
HighLights
मलहाना गांव के 20 परिवारों के घर महानंदा नदी में विलीन हो गए।
अमौर-बैसा में पुल और सड़क पर भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
स्थायी कटाव निरोधक कार्य न होने से ग्रामीण चिंतित और विस्थापित हैं।
जागरण टीम, बायसी (पूर्णिया)। मानसून की वर्षा से नदियों के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई है और इसके साथ ही शुरू हो गया है नदी किनारे बसे गांवों में इसकी विध्वंसक गतिविधियां।
महानंदा में पानी का बहाव तेज होने के साथ अमौर एवं बैसा प्रखंड के कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, पुल और सड़क पर भी कटाव की चपेट में है।
वहीं, नदी किनारे बसे गांव के लोग अपनी हाथों से अपने घर उजाड़ कर पलायन की तैयारी कर रहे हैं। अमौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मलहाना गांव के नजदीक नदी का कटाव भीषण रूप ले लिया है।
पिछले दो दिनों में 20 परिवारों के घर महानंदा नदी के पेट में विलीन हो गये हैं। जबकि मल्हाना गांव के अभी भी दर्जनों परिवारों के घर महानंदा की जद में है।
गांव के नजदीक भीषण नदी कटाव जारी है। जिसके कारण कई घरों पर फिर से नदी में समा जाने का खतरा मंडराने लगा है तथा लोग रतजगा कर रहे हैं।
जिस तरह कटाव का कहर जारी है, ऐसा लग रहा है कि महानंदा नदी किनारे स्थित मल्हना गांव का अस्तित्व अब समाप्त हो जाएगा। इससे पहले भी बायसी क्षेत्र के कई गांव, सैकड़ों एकड़ खेतिहर जमीन व मस्जिद, स्कूल नदी में समा चुके हैं।
सैकड़ों परिवार अब भी विस्थापित होकर एन एच किनारे व अन्य सुरक्षित स्थानों पर किसी तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। महानंदा नदी में विलीन हुए मल्हान गांव के भी करीब दो दर्जन परिवार के समक्ष रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
पीड़ित परिवारों में शामिल मो. शाहबुल, मो. बाबुल, मास्टर जमील, मो. ऐहसान, मो. शकील, जुलेखा खातुन, अरसदी बेगम, अब्दुल कुद्दुश, मो. हातीम, मो. नूर आलम, मो. मिस्टर, मो. नजरुल, मो मजरूल, नेहाल अख्तर, मो. अनसारूल, मो. इफ्तिखार, राबे बेगम, नुरी खातुन, मो. नैयर, सबा आलम, मो. रूकसेद आदि ने बताया कि उनका घर-बार सब नदी में समा चुका है।
लोगों की उड़ रही नींद
अमौर एवं बैसा में नदियों के कटाव से लोगों की रात की नींद उड़ गई है। लोग घर छोड़कर पलायन कर रहे हैं। गांव के लोगों को अब खेतों की चिंता नहीं है। क्योंकि गांव के ज्यादातर लोगों की जमीन कई वर्ष पूर्व ही महानंदा नदी में कटाव के चलते समा गया है।
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लेकिन अब अगर गांव ही नदी में विलीन हो जाएगा उनके समक्ष आवास की प्रमुख समस्या आ जाएगी। जिस तरह नदी कटाव जारी है इससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इस वर्ष मलहाना गांव बच पाएगा या नहीं।
नदी कटाव की सूचना पर गांव पहुंचे पूर्व विधायक सबा जफर ने बताया कि संबंधित विभाग के अधिकारी नदी कटाव रोकने हेतु कटाव निरोधक कार्य कराने का आश्वासन दिया।
काम शुरू भी हुआ लेकिन काफी देर से। जिसके कारण अचानक जलस्तर बढ़ने से स्थिति विकराल हो गई है। भाजपा पंचायत अध्यक्ष मो कमरूज्जमां एवं पूर्व मुखिया शमशाद आलम ने बताया कि बाढ़ के मौसम में हर वर्ष नदी कटाव होता है, परंतु आज तक सरकार द्वारा स्थायी कटाव निरोधक कार्य नहीं किया गया।
अगर स्थायी कटाव निरोधक कार्य किया जाता तो सैंकड़ों एकड़ जमीन एवं दर्जनों परिवार नदी कटाव के चपेट में नहीं आते। सिरसी पंचायत के मुखिया हसनैन आलम ने कहा कि जब बरसात का मौसम आता है तथा नदी कटाव तेज हो जाता है तो विभाग के अधिकारियों द्वारा नदी कटाव को रोकने हेतु सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।
जबकि इस से कुछ भी फायदा नहीं होता है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्थायी कटाव निरोधक कार्य कराने की मांग की है। वहीं अंचलाधिकारी गोपाल कुमार ने बताया कि स्थल निरीक्षण के उपरांत वस्तु - स्थिति से विभाग एवं जिला पदाधिकारी को अवगत करा दिया गया है।
दास नदी का रौद्र रूप
वहीं, अमौर में दास नदी ने भी रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दास नदी से हो रहे कटाव से रंगरेया लाल टोली पंचायत के दर्जनों परिवारो के घर कटान की जद में आ गया है। जिससे प्रभावित दर्जनों परिवार में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।
रंगरेया लाल टोली पंचायत के मुखिया सज्जाद आलम ने बताया कि प्रशासन को उन लोगों की कोई चिंता नहीं है। जब बाढ़ आता है तो यहां निरोधात्क कार्य की खानापूर्ति की जाती है। इसी का परिणाम है कि आज वर्जनों परिवार के घर कटान के चपेट में आ गया है और इसे देखने वाला कोई नहीं है।
जलस्तर में वृद्धि से इसी गांव के बगल में नदी में बना पुल का एप्रोच पानी के दबाव के कारण धंस रहा है। समय रहते अगर प्रशासन ने पहल नहीं की तो पुल के साथ सड़क भी कटान की चपेट में आ जायेगा।
जिससे कई गांव का आवागमन प्रखंड मुख्यालय से भग हो जाएगा । इसलिए ग्रामीणो ने जिला पदाधिकारी से इस ओर ध्यान देकर गांव के कटान को रोकने कि मांग की है।
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