2028 तक सीमांचल में बिछेगा बिजली का नया जाल! संसद में पप्पू यादव की मांग पर सरकार का बड़ा एलान
सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में कोसी-सीमांचल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था का मुद्दा उठाया, जिसमें नए ग्रिड सब-स्टेशनों और उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइन ...और पढ़ें

कोसी-सीमांचल की बिजली व्यवस्था पर पप्पू यादव ने उठाई आवाज (फेसबुक)
HighLights
सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में बिजली व्यवस्था का मुद्दा उठाया।
केंद्र ने बिहार में कई बिजली परियोजनाओं की जानकारी दी।
पूर्णिया में नए ग्रिड सब-स्टेशन और लाइनें प्रस्तावित हैं।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (MP Pappu Yadav) ने लोकसभा में पूर्णिया-सीमांचल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने केंद्रीय विद्युत मंत्री से प्रश्न पूछते हुए वर्ष 2030 तक देश में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना, बिहार में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वीकृत बिजली परियोजनाओं तथा कोसी-सीमांचल क्षेत्र में प्रस्तावित नए ग्रिड सब-स्टेशनों और उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनों की विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद ने विशेष रूप से पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए आधुनिक विद्युत अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर में विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2031-32 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 874 गीगावाट तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके लिए तापीय, जलविद्युत, परमाणु, नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है।
सरकार ने अतिरिक्त 1.05 लाख मेगावाट तापीय क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा हजारों मेगावाट की जलविद्युत, परमाणु, सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। सरकार वर्ष 2032 तक देशभर में लगभग 1.91 लाख सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें और 1,274 जीवीए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता विकसित करने की योजना पर भी कार्य कर रही है।
बिहार से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उत्पादन क्षेत्र में नवीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (चरण-2) की दो 800-800 मेगावाट इकाइयों तथा पीरपैंती अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की चार 800-800 मेगावाट इकाइयों पर कार्य चल रहा है।
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वहीं, अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली के तहत लगभग 1,016 सीकेएम नई पारेषण लाइनें, 468 सीकेएम री-कंडक्टरिंग तथा लगभग 8,200 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता वृद्धि की परियोजनाएं स्वीकृत हैं।
सांसद पप्पू यादव द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने पहली बार पूर्णिया क्षेत्र में प्रस्तावित विद्युत परियोजनाओं का विस्तृत ब्यौरा भी सदन में रखा।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2028-29 तक भवानीपुर में 132/33 केवी क्षमता का नया ग्रिड सब-स्टेशन तथा उससे जुड़ी धामदाहा-बनमंखी 132 केवी लाइन का निर्माण प्रस्तावित है। वर्ष 2030-31 तक कस्बा में 220/132 केवी ग्रिड सब-स्टेशन और कटिहार (आईएसटीएस)-कस्बा 220 केवी डबल सर्किट लाइन पर कार्य किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत 10,559 करोड़ रुपये के वितरण अवसंरचना कार्य तथा 2,021 करोड़ रुपये की स्मार्ट मीटरिंग परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
इन योजनाओं के अंतर्गत नए सब-स्टेशन, ट्रांसफार्मर, कंडक्टर अपग्रेडेशन, एबीसी केबल, फीडर पृथक्करण और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को 31 मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लोकसभा में यह मुद्दा उठाकर सांसद पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र की बढ़ती आबादी, औद्योगिक संभावनाओं और कृषि आवश्यकताओं को देखते हुए मजबूत बिजली अवसंरचना समय की जरूरत है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पूर्णिया और सीमांचल की विद्युत परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा में पूर्णिया-सीमांचल क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने केंद्रीय विद्युत मंत्री से प्रश्न पूछते हुए वर्ष 2030 तक देश में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना, बिहार में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वीकृत बिजली परियोजनाओं तथा कोसी-सीमांचल क्षेत्र में प्रस्तावित नए ग्रिड सब-स्टेशनों और उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनों की विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद ने विशेष रूप से पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए आधुनिक विद्युत अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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