पूर्णिया के बिंद टोली में अब नहीं होगा मृत्यु भोज, नहीं खाएंगे दर्द का खाना
पूर्णिया के बिंद टोली गांव में ग्रामीणों ने मृत्यु भोज की प्रथा को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कर ...और पढ़ें
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HighLights
पूर्णिया के बिंद टोली में मृत्यु भोज पर रोक।
आर्थिक बोझ कम करने के लिए ग्रामीणों का फैसला।
पूर्व पार्षद प्रतिनिधि ललन यादव ने की अगुवाई।
प्रशांत चौधरी, पूर्णिया। मरंगा थाना क्षेत्र के बिंद टोली वार्ड नंबर आठ में एक बड़े सामाजिक फैसले पर मुहर लगी है। गांव में अब मृत्यु भोज नहीं होगा। आर्थिक रुप से पहले दबे लोग हों या फिर संपन्न भी किसी के लिए मृत्यु भोज अब जरुरी नहीं रहा।
लोग इस भोज पर एक स्वर से पूर्ण विराम लगा दिया। इसका बंध पत्र भी तैयार हुआ है। किसी ने अंगूठे तो किसी ने अपना हस्ताक्षर इस पर किया है। सभी को इस बात की खुशी है कि उनके इस फैसले का बड़ा लाभ लोगों को मिलेगा। खासकर वैसे लोग जो आर्थिक लाचारी में या तो कर्ज में और डूब जाते हैं या फिर उनकी जमीन बिक जाती है।
मां-बेटे के साथ निधन के बाद तेज हुई सुगबुगाहट
बिंद टोली वार्ड नंबर आठ के पूर्व पार्षद प्रतिनिधि ललन यादव उर्फ लालू यादव की अगुवाई में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। यह गांव लगभग चार सौ परिवारों वाला है। यहां की आबादी डेढ़ हजार है। संपन्न लोग यहां नहीं के बराबर है।
यहां पांच दिन पूर्व कभी समाज को अक्षर ज्ञान देने वाली 80 वर्षीया प्रमिला देवी व उसके छोटे बेटे मांगन की मौत एक ही रात हो गई। दोनों बीमार चल रहे थे। मांगन आटो चलाता था। ऐसे में भूमिहीन इस परिवार में बचे बड़े बेटे राजेश कुमार यादव के हाथ पांव फूलने लगे।
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दोहरा दर्द के बीच मृत्यु भोज के लिए पैसे जुटाने की विवशता ने उसे आतुर कर दिया। इस स्थिति में ही उनके घर सांत्वना देने गांव के ही सुरेंद्र यादव, दिनेश यादव, पूर्व सरपंच, प्रेमचंद यादव, उमेश यादव व ललन यादव, वहां पहुंचे थे।
इस पर राजेश यादव ने अपनी लाचारी जताते हुए मृत्युभोज नहीं कर पाने की बात कही। इस लाचारी को समाज ने गंभीरता से लिया और आगे यह स्थिति किसी और को भी नहीं झेलना पड़े, इस चलते मृत्यु भोज पर ठोस लेने का निर्णय लिया।
पंचायत बैठी और सभी ने इस निर्णय पर मुहर लगा दिया। ग्रामीण प्रदीप यादव, अरुण यादव, मिथिलेश कुमार, रमेश कुमार, बमबम कुमार विनय, गौतम यादव व बिंदेश्वरी यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यह निर्णय खुशी देने वाला है। यह बाध्यता हमें लाचार कर रहा था।