जीविका की नई पहल: डेहरी प्रखंड में 17 पशु सखियां बन गईं ‘डॉक्टर दीदी’, जानवरों की कर रहीं सेवा
डेहरी प्रखंड की महिलाएं अब पशु सखी बनकर आत्मनिर्भर हो रही हैं। जीविका परियोजना से जुड़कर ये 'डॉक्टर दीदी' पशुओं, खासकर बकरियों के स्वास्थ्य की देखभाल ...और पढ़ें
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जीविका दीदी से बन गई पशु सखी

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राम अवतार चौधरी, डेहरी आन सोन (रोहतास)। कभी सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित रहीं डेहरी प्रखंड की ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार को खेती-किसानी में मदद करती हैं, घर संभालती हैं और फिर निकल पड़ती हैं नए मिशन पर... यह मिशन है पशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और पशुपालकों को जागरूक करने का।
डेहरी प्रखंड की पशु सखियों के बारे में, जिन्हें अब गांव के लोग डॉक्टर दीदी कहकर बुलाने लगे हैं। ये डॉक्टर दीदीयां आज जीविका परियोजना से जुड़ कर पशु सखी के रूप में पशुओं की स्वास्थ्य की बेहतरी, दूध उत्पादन, पशु उत्पादन, किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
फिलहाल जीविका से जुड़ी पशु सखी डेहरी प्रखंड के 13 पंचायतों में 24 पशु चिकित्सक बहाल थी। परंतु वर्तमान में अबतक 17 पशु सखी बकरियों के स्वास्थ्य की देखरेख का कार्य कर है। चयनित पशु सखी जो पंचायत में 120 एवं मैक्सिमम 300 बकरी पालकों के बीच जीविका दीदी के घर-घर जाकर बकरियों को स्वास्थ्य संबंधी बिमारियों के देखभाल के साथ क्रीमी की दवा खिलाने के साथ देखभाल कर रही हैं।
पशु सखियों के इस मॉडल की भूमिका को आज काफी सराहना मिल रही है और मिले भी क्यों ना, पशुओं की देखभाल से जुड़ी बिहार सरकार की जीविकोपार्जन योजना को सहयोग जो मिल रहा है। इससे सरकार पशुपालन क्षेत्र के विकास-विस्तार में खास मदद मिल रही है।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि और पशुपालन पर ही निर्भर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास कृषि और पशुपालन पर ही निर्भर है। पशुपालन और डेयरी बिजनेस पूरी तरह पशुओं पर बेस्ड है, इनकी अच्छी सेहत और अच्छी देखरेख पर ही किसान- पशुपालकों की आमदनी निर्भर करती है, हालांकि कई बार इनकी सेहत में अनदेखी का बुरा अंजाम भी देखने को मिलता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार डेहरी प्रखंड में भी पशुधन उत्पादन का ज्यादातर काम भूमिहीन और गरीब किसानों ने संभाला हुआ है। इस काम में महिलाओं का योगदान 70 प्रतिशत है। पिछले एक दशक में दूध, अंडे, मांस की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है, इसे देखते हुए पशु सखी द्वारा पशुओं का उपचार घर पर जाकर कर रही है।
जीविका का उद्देश्य दीदियों की आय में वृद्धि
जीविका परियोजना का उद्देश्य दीदियों को पशुपालन से जोड़कर उनकी मासिक आय में वृद्धि करना है। इस पहल से दीदियों को सुनिश्चित बाजार मिलेगा और उनके उत्पादों को बेहतर कीमत मिलेगी। जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
अगर किसी पशुपालक को अपनी बकरी का इलाज कराना होता है तो वह किसी डॉक्टर के पास नहीं बल्कि पशु सखी के पास जा रही है। जिले की अधिकतर महिलाएं बकरी पालन के गुणों को सीख कर बकरियों की उत्पादन और उत्पादक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ अपने आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही हैं।
डेहरी प्रखंड जीविका परियोजना की पहल से बकरियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने हेतु प्रखंड में 17 पशु सखी प्रशिक्षित होकर पंचायत में बकरियों का उपचार कर रहीं है और जीविका दीदी जो बकरी पालन कर रही है, प्रत्येक पंचायत में उनके 120 एवं मैक्सिमम 300 बकरी पालकों के घर तक बकरियों को किमी की दवा पिलाने के सेवा दे रहीं हैं। इसके साथ ही टीकाकरण की सुविधा भी दी जा रही है।
जय प्रकाश नारायण, जीवीको प्रार्जन परियोजना डेहरी प्रखंड जीविका