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    बिहार पंचायत चुनाव 2026: रिजर्वेशन सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी, आरक्षित पदों का चक्र बदलेगा

    Updated: Thu, 14 May 2026 04:26 PM (IST)

    बिहार में 2026 के पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। पिछले दो चुनावों में आरक्षित पदों का चक्र बदलेगा, जिससे नए चेहरे और ...और पढ़ें

    रिजर्वेशन सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी, आरक्षित पदों का चक्र बदलेगा

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    संवाद सूत्र, सत्तरकटैया (सहरसा)। त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव 2026 को लेकर आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव की प्रशासनिक तैयारी जारी है। पिछले दो पंचायत चुनावों में जिन पदों पर एक ही कोटि के प्रत्याशियों को आरक्षण का लाभ मिला था, अब वहां आरक्षण का चक्र बदल जाएगा। इस बदलाव से पंचायत राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदलने की संभावना जताई जा रही है।

    पंचायती राज अधिनियम के प्रावधान के अनुसार लगातार दो आम चुनाव तक किसी पद को आरक्षित रखने के बाद उसका आरक्षण चक्र बदलना अनिवार्य है। इसी व्यवस्था के तहत वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में तीसरी बार आरक्षण चक्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

    2006 में लागू हुई थी आरक्षण व्यवस्था

    बिहार में वर्ष 2006 में पहली बार पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न पदों पर आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी। इसका पहला चक्र वर्ष 2011 में समाप्त हुआ।

    इसके बाद वर्ष 2016 एवं 2021 के पंचायत चुनाव में जिन पदों को लगातार दो बार एक ही कोटि के लिए आरक्षित रखा गया था, अब वर्ष 2026 में उन पदों की आरक्षण स्थिति बदल जाएगी।

    वर्ष 2021 में आरक्षित रहे पदों को समाप्त कर नई जनगणना के आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। इससे कई पंचायतों में नए चेहरे और नए समीकरण उभरने की संभावना बढ़ गई है।

    क्या है आरक्षण व्यवस्था का नियम?

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं को अधिकतम 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाता है।

    उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में अनुसूचित जाति या जनजाति की आबादी 25 प्रतिशत है तो वहां उतने प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएंगे। इसके अलावा शेष पदों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग को करीब 20 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है।

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    पंचायत सदस्यों का आरक्षण ग्राम पंचायत के कुल पदों के आधार पर तय किया जाता है, जबकि मुखिया पद का आरक्षण पंचायत समिति क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों को आधार मानकर निर्धारित होता है।

    इसी प्रकार पंचायत समिति सदस्यों का आरक्षण पंचायत समिति के कुल सदस्यों के आधार पर तथा प्रखंड प्रमुख पद का आरक्षण जिले के कुल पदों के 50 प्रतिशत के आधार पर तय किया जाता है।

    पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण चक्र बदलने की संभावना से संभावित उम्मीदवारों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई पुराने दावेदारों की उम्मीदों को झटका लग सकता है, जबकि नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खुल सकता है।

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