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    क्या आपकी पंचायत की सीमा बदल सकती है? बिहार में परिसीमन के लिए नई गाइडलाइन जारी

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 01:31 PM (IST)

    बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन और पुनर्गठन के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जो 2011 की जनगणना पर आधारित ...और पढ़ें

    2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

    2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन। सांकेत‍िक तस्‍वीर

    HighLights

    1. 2011 की जनगणना के आधार पर होगा पुनर्गठन।

    2. प्राकृतिक सीमाओं और भौगोलिक क्रम को प्राथमिकता दी जाएगी।

    3. सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय मानदंड तय।

    जाकिर अली, छपरा। बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग ने राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन और प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है।

    बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत जारी अधिसूचना के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के क्षेत्रों का पुनर्गठन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।

    पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी, जबकि जिला स्तर पर इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की होगी।

    2011 की जनगणना के आधार पर होगा पुनर्गठन

    वहीं, प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त को सतत अनुश्रवण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    जारी निर्देशों के अनुसार परिसीमन करते समय प्राकृतिक सीमाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां संभव होगा, वहां नदियां, पहाड़ियां, सड़कें, रेलवे लाइन तथा अन्य स्पष्ट सार्वजनिक चिन्हों को सीमा के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

    निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण उत्तर-पश्चिम दिशा से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व दिशा तक क्रमवार किया जाएगा। किसी भी राजस्व ग्राम को सामान्य स्थिति में विभाजित नहीं किया जाएगा। केवल अत्यधिक आबादी की स्थिति में ही उसे एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में बांटने की अनुमति होगी।

    प्राकृतिक सीमाओं और भौगोलिक क्रम का रखना होगा ध्यान

    गाइडलाइन में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के प्रत्येक स्तर के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। ग्राम पंचायत के सभी वार्ड उसकी भौगोलिक सीमा के भीतर रहेंगे।

    पंचायत समिति के निर्वाचन क्षेत्र ऐसे बनाए जाएंगे कि किसी ग्राम पंचायत के वार्ड का विभाजन न हो। इसी प्रकार जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों का गठन पंचायत समिति की सीमाओं को अक्षुण्ण रखते हुए किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक समन्वय और चुनावी व्यवस्था में किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।

    पंचायत मुख्यालय के निर्धारण के लिए भी स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं। सामान्य स्थिति में मुख्यालय उस गांव में स्थापित किया जाएगा जिसकी जनसंख्या सबसे अधिक होगी।

    हालांकि यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की संयुक्त आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, तो मुख्यालय उस गांव में बनाया जाएगा जहां इन वर्गों की आबादी का अनुपात सर्वाधिक होगा। पंचायत का नाम भी उसी गांव के नाम पर रखा जाएगा।

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    दावा-आपत्‍त‍ि का म‍िलेगा मौका 

    विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा और विकास योजनाओं का लाभ वंचित एवं पिछड़े क्षेत्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

    साथ ही स्पष्ट सीमांकन से प्रशासनिक विवाद कम होंगे और पंचायत स्तर पर कार्य संचालन अधिक सुगम बनेगा। 
    परिसीमन की प्रारंभिक अधिसूचना प्रखंड एवं जिला मुख्यालय के सूचना-पट पर प्रकाशित की जाएगी।

    इसके बाद आम नागरिकों को 15 दिनों के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद जिलाधिकारी अंतिम अधिसूचना जारी करेंगे, जिसके आधार पर नई पंचायत सीमाएं प्रभावी होंगी।

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