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    सारण में खीरे की खेती से किसानों की बदली तकदीर, खेतों में लौटी खुशहाली

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 04:15 PM (IST)

    सारण के जलालपुर प्रखंड में खीरे की खेती ने किसानों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। रेवाड़ी पंचायत के मंझवलिया गांव में 20 साल पहले शुरू हुई यह पहल अब प ...और पढ़ें

    खीरे की खेती। (जागरण)

    खीरे की खेती। (जागरण)

    HighLights

    1. खीरे की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारी।

    2. मंझवलिया गांव खीरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना।

    3. कम लागत में प्रति एकड़ 6-9 लाख रुपये आय।

    संवाद सूत्र, जलालपुर (सारण)। कभी मौसम की मार और कम आमदनी से जूझने वाले किसानों के खेत आज खीरे की हरियाली से लहलहा रहे हैं।

    गर्मी के मौसम में खीरे की खेती ने किसानों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है और अब यह फसल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

    प्रखंड के रेवाड़ी पंचायत में करीब 20 वर्ष पहले अधिवक्ता सह किसान भृगुराम सिंह द्वारा शुरू की गई पहल आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी है।

    खीरा उत्पादन का बना प्रमुख केंद्र 

    उस समय यह एक प्रयोग मात्र था, लेकिन आज मंझवलिया गांव खीरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां उत्पादित खीरे की गुणवत्ता और स्वाद ने इसे दूर-दूर तक पहचान दिलाई है। कई किसान इसकी खेती से जुडें हैं।

    किसानों के अनुसार, मंझवलिया का खीरा बाहर से आने वाले खीरों की तुलना में अधिक ताजा और स्वादिष्ट होता है, जिससे बाजार में इसकी अलग पहचान बन गई है।

    कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। महज 45 से 50 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल से प्रति एकड़ 350 से 400 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा है।

    5000 रुपये की लागत

    किसानों का कहना है कि लगभग पांच हजार रुपये की लागत से शुरू होने वाली इस खेती से प्रति एकड़ छह से नौ लाख रुपये तक की आमदनी संभव है, जिससे उनके घरों में खुशहाली लौट आई है।

    खेती को बढ़ावा देने में स्थानीय बाजार की भी अहम भूमिका है। मंझवलिया गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित टेकनिवास बाजार किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

    किसान सुबह-सुबह खेतों से ताजा खीरा तोड़कर बाजार पहुंचते हैं, जहां स्थानीय के साथ-साथ बाहरी व्यापारी भी तुरंत खरीदारी कर लेते हैं। इससे किसानों को समय पर उचित मूल्य मिल जाता है और उनकी उपज खराब होने का खतरा भी कम हो जाता है।

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    आर्थिक स्थिति में आया सुधार

    युवा किसान संतोष कुमार सिंह बताते हैं कि खीरे की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को काफी बेहतर किया है। अब यह फसल उनकी आय का स्थायी और भरोसेमंद स्रोत बन चुकी है।

    वहीं, कृषि विज्ञान केन्द्र, मांझी के कृषि वैज्ञानिक डा. जितेंद्र चंद्र चंदोला का कहना है कि नियंत्रित वातावरण, उन्नत तकनीक और संतुलित पोषण के साथ की गई खेती से खीरे की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है। किसानों की मेहनत और आधुनिक तकनीक के समन्वय से आज खेतों में समृद्धि दिख रही है।

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