बदलेगी सोनपुर की सूरत! ₹680 करोड़ से बनने वाले हरिहरनाथ कॉरिडोर के लिए जमीन सर्वे शुरू
सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक केंद्र बनाने के लिए 680 करोड़ रुपये की हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना पर काम शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

हरिहरनाथ कॉरिडोर के लिए जमीन सर्वे शुरू
HighLights
680 करोड़ की हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना शुरू।
प्रशासन ने भूमि सर्वेक्षण, सीमांकन कार्य तेज किया।
सोनपुर में धार्मिक पर्यटन, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
राहुल, नयागांव (सारण)। बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना अब जमीन पर आकार लेने लगी है। करीब 680 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित हरिहरनाथ कारिडोर परियोजना के लिए प्रशासन ने भूमि सर्वेक्षण और सीमांकन का कार्य शुरू कर दिया है।
अंचल प्रशासन की ओर से छह अमीनों की टीम को इस कार्य में लगाया गया है, जो मंदिर परिसर और आसपास के प्रस्तावित क्षेत्र की जमीनों की पैमाइश, सीमाओं के निर्धारण तथा राजस्व अभिलेखों के सत्यापन में जुटी हुई है।
परियोजना के क्रियान्वयन को मिलेगी रफ्तार
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सर्वेक्षण का उद्देश्य परियोजना क्षेत्र की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है, ताकि आगे की कार्ययोजना को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
भूमि संबंधी सभी तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है। इसे हरिहरनाथ कारिडोर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रारंभिक कदम माना जा रहा है।
सोनपुर की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र
बाबा हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके बावजूद मंदिर क्षेत्र में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती रही है।
श्रद्धालुओं को पार्किंग, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, सुगम आवागमन तथा व्यवस्थित दर्शन व्यवस्था जैसी सुविधाओं के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आसपास के क्षेत्र का समग्र विकास
हरिहरनाथ कारिडोर परियोजना को इन समस्याओं के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र का समग्र विकास किए जाने की योजना है।
इसके पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक धार्मिक वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है। साथ ही मंदिर परिसर का स्वरूप भी अधिक आकर्षक और व्यवस्थित बन सकेगा।
सीमांकन और अभिलेखों के मिलान के दौरान चुनौतियां
हालांकि भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया प्रशासन के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। मंदिर के आसपास का इलाका घनी आबादी, पुराने आवासीय क्षेत्रों, छोटे व्यवसायों और निजी स्वामित्व वाली जमीनों से घिरा हुआ है। ऐसे में सीमांकन और अभिलेखों के मिलान के दौरान कई प्रकार की व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
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कुछ स्थानों पर पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति में अंतर मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। इसलिए प्रशासन पारदर्शिता के साथ सर्वेक्षण कार्य पूरा करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
स्थानीय लोगों में उत्साह
परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह के साथ-साथ कुछ चिंताएं भी हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि मंदिर क्षेत्र का विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ स्थानीय दुकानदारों, गरीब परिवारों और वर्षों से यहां निवास कर रहे लोगों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि किसी को विस्थापित होना पड़ता है तो पुनर्वास, उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित
हरिहरनाथ कारिडोर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय व्यापार, होटल, धर्मशाला, परिवहन, प्रसाद, फूल-माला और पूजा सामग्री से जुड़े कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है।
रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद के बीच लोगों को विश्वास है कि यह परियोजना सोनपुर को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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