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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Gajar Ki Kheti: गाजर की खेती ने किसान को बनाया मालामाल, कमाई जानकर रह जाएंगे हैरान

    Updated: Mon, 03 Feb 2025 04:53 PM (GMT+05:30)

    शेखपुरा के कुंजरा वर्ग के किसान पीढ़ियों से गाजर की खेती कर रहे हैं। यह खेती उनके परिवारों के भरण-पोषण का मुख्य साधन है। खासकर सरस्वती पूजा के समय गाज ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
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    HighLights

    1. गाजर की खेती से चला रहे हैं परिवार का भरण-पोषण
    2. सरस्वती पूजा में बिक्री से होती है अच्छी आमदनी

    जागरण संवाददाता, शेखपुरा। अरियरी प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित रामपुर गांव के कुंजरा वर्ग से संबंधित करीब 25 परिवार गाजर की खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

    खास कर सरस्वती पूजा में इसकी बिक्री से अच्छी आमदनी होती है। इसी को ध्यान में रख कर इसकी खेती लोग करते है।

    गांव के 95 वर्षीय इसहाक बताते हैं कि गाजर की खेती यहां पांच पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, जिसने कई परिवारों की आजीविका का आधार मजबूत किया है।

    पट्टे पर जमीन लेकर करते हैं गाजर की खेती 

    • गांव के किसान तौफिक, मंजर, कमाम, मुसा और महिला किसान हलीमा खातून व समसा खातून ने बताया कि उनके पास खुद की जमीन नहीं है। वे पट्टे पर जमीन लेकर गाजर की खेती करते हैं।
    • किसान जुलाई से सितंबर के बीच गाजर की रोपाई करते हैं और नवंबर से फसल तैयार होने लगती है। अच्छी पैदावार के दौरान प्रति कट्ठा 10 से 12 मन गाजर उपजती है।
    • बाजार में काले प्रजाति के गाजर की कीमत 700 से 900 रुपये प्रति मन, जबकि लाल प्रजाति की कीमत 1200 से 1500 रुपये प्रति मन तक होती है। इसी उपज से इन परिवारों का पूरा खर्च चलता है।

    ऐसे हो सकता है उपज और गुणवत्ता में सुधार

    गांव के समाजसेवी और जागरण क्लब के अध्यक्ष मो. मुमताज साह ने बताया कि यदि किसानों को जिला कृषि विज्ञान केंद्र से बेहतर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिले तो उपज और गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

    किसानों ने सरकार से गाजर भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि खासकर लाल प्रजाति के गाजर को सालभर बाजार में उपलब्ध कराया जा सके। मुमताज साह ने जिला प्रशासन से इस ओर ध्यान देने और गाजर की खेती को प्रोत्साहित करने की अपील की है।

    टमाटर, बैगन, सब्जी की खरीददार नहीं मिलने से किसान परेशान

    उधर, नगरनौसा प्रखंड में टमाटर, बैगन सब्जी उत्पादक किसानों को इस बार सब्जी का उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है।

    इस संबंध में नगरनौसा प्रखंड सब्जी उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड के अध्यक्ष कंचन कुमारी ने बताया कि नगरनौसा प्रखंड अंतर्गत कैला पंचायत के कैला, मकदुमपुर गढियाप, रामचक दुधैला, प्रेमन बिगहा, लोदीपुर, हर गोपालपुर, उस्मानपुर, महमदपुर गांव में खासकर बैंगन, टमाटर फसलों की खेती व्यापक स्तर पर हो रही है।

    प्रखंड में टमाटर, बैंगन की खेती 252 हेक्टेयर भूमि पर हो रही है। जिससे प्रति दिन 62 मिट्रिक टन उत्पादन किसानों द्वारा किया जा रहा है।

    प्रखंड के अधिकांश किसान नगद राशि से खेती पट्टा पर लेकर सब्जी उगाने का कार्य करते है। किसान रमेश पासवान ने बताया कि जो खेत धान, गेहूं के लिए नगद पट्टा पर लेते हैं उसका सलाना राशि 15000 हजार से 18000 हजार तक रैयत लोग लेते हैं।

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    वहीं खेती टमाटर, बैगन के लिए 25000 हजार से 30000 हजार रुपये तक लेकर सब्जी की खेती कर रहे हैं। गढ़िया पर के किसान अरविन्द कुमार, संजीत कुमार, जगदीश यादव ने बताया कि हमलोग 10-10 बिगहा में बैंगन की खेती कर रहे हैं।

    एक बीघा बैंगन की खेती करने में 61 हजार रुपये खर्च होता है, अभी तक हम किसानों को लागत का आधा हिस्सा भी नहीं आया है।

    वर्तमान समय में स्थिति यह है कि खेत में बैगन लगभग 3 रुपये प्रति किलोग्राम और टमाटर 4, से 5 रुपये प्रतिकिलोग्राम खरीदार लेने आ रहे हैं। जब की खेत में सब्जी तोड़ने की मजदूरी भी शामिल है। इसी को लेकर किसान परेशान है।

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