नेपालियों पर भारी पड़ रहे बालेन सरकार के नए नियम, ससुराल से मिले गिफ्ट बने कबाड़
नेपाल में बालेन सरकार के नए नियमों (Nepal New Rules) के चलते भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों पर रोक लग गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ गया ...और पढ़ें

बालेन शाह और बॉर्डर पार करता कपल। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनिल तिवारी, सीतामढ़ी। नेपाल के मधेश इलाके में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। भारत की सीमा से लेकर वहां के घर-आंगन तक माहौल तनाव और गुस्से से भरा है। भारत में बसे स्वजन व रिश्तेदारों के माध्यम से जिस उत्साह और उमंग के साथ उपहार स्वरूप वाहन लाए थे, वे अब कबाड़ बनने की ओर अग्रसर नजर आ रहे हैं। वे इन वाहनों का क्या करें समझ में नहीं आ रहा है।
नेपाल में हाल ही अस्तित्व में नई सरकार के मुखिया बालेन्द्र शाह उर्फ बालेन सरकार अपने देश में भारतीय नंबर के वाहनों के उपयोग (Indian Vehicle Rules In Nepal) पर रोक लगा दी है। यहां तक कि भारत की ओर से वाहन के साथ आने वाले लोगों के लिए भी वर्ष में मात्र 30 दिनों तक की इंट्री का नियम रखा है। सरकार के इन नियमों और उसपर सख्ती से भारत-नेपाल के बीच बेटी-रोटी संबंधों पर खरोंच माना जा रहा है।
दहेज में मिला वाहन पड़ा महंगा
नेपाल के गौर में बसे भूपेन्द्र प्रताप सिंह के चेहरे पर कई तरह की आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। उनके साले बेलसंड निवासी राणा अमर सिंह ने बड़े प्यार और स्नेह से अपने बहनोई के लिए दो वर्ष पहले बुलेट खरीद कर दिया था। उस समय नेपाल में बुलेट की कीमत भारत से डेढ़ गुणा अधिक थी।
जब घर में पीहर से बुलेट बाइक तो परिवार में खुशियों का ठिकाना नहीं था, मगर आज वहीं स्थिति बदल गई है। बुलेट जी का जंजाल बन गया है। नई सरकार के फरमान को देखते हुए उपहार में मिले बुलेट को बेचने और भारत में लौटाने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है।
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यह सिर्फ भानू प्रताप सिंह नहीं बल्कि मधेश में बसे अधिकांश परिवारों के साथ यहीं स्थिति है। अव्वल तो यह कि अब भारत से भेजी गई 100 रुपये से अधिक की सामग्रियों पर उन्हें नेपाल में टैक्स (bhansar on Indins Goods देना पड़ रहा है। ऐसे में भारत में मिले उपहारों को भी स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
नेपाल में उठी विरोध की आवाज
इसको लेकर नेपाल में भी आवाज उठने लगी है। पिछले दिनों कोड़ेना के मेयर रूपेश कुमार ने भी इसको लेकर सरकार को पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में सरकार के हालिया निर्णय पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि भारत और नेपाल के बीच केवल एक अंतर्राष्ट्रीय सीमा ही नहीं, बल्कि सदियों पुराना धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच विवाह, व्यापार और दैनिक आवागमन हमेशा से सहज और निर्बाध रहा है। विशेष रूप से विवाह के दौरान भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहन दहेज के रूप में मिलने की परंपरा भी रही है। ऐसे वाहनों का सीमित क्षेत्र में उपयोग लंबे समय से होता आया है, जिस पर कभी कोई विवाद नहीं रहा।
नेपाल सरकार से फैसला वापस लेने की अपील
सीमावर्ती नागरिक वर्षों से 25 किलोमीटर तक स्वतंत्र रूप से आवागमन करते रहे हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती रही हैं। लेकिन नए प्रतिबंध के कारण न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बल्कि आपसी संबंधों में भी कड़वाहट आने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने नेपाल सरकार से आग्रह किया गया है कि वह इस फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करे और भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों को सीमित क्षेत्र में पहले की तरह चलने की अनुमति प्रदान करे।
मेयर रूपेश कुमार ने कहा कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो इसका असर दोनों देशों के नागरिकों के बीच वैवाहिक संबंधों, सामाजिक सौहार्द और दैनिक जीवन पर नकारात्मक रूप से पड़ेगा।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह प्रतिबंध केवल वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ताना-बाना और आपसी विश्वास भी प्रभावित होगा।
जेन जी पर्सा के संयोजक महादेव प्रसाद कुर्मी ने भी शुक्रवार को प्रमुख जिला अधिकारी भोला दहाल को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय और सख्ती पर एतराज जता चुके हैं।
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